काठमांडू। जल प्रलय के बाद कम से कम 100 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। करीब 384 लोग लापता/संपर्क से बाहर बताए गए हैं। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल बताए गए हैं। लापता लोगों में भारतीय नागरिक भी हैं—लगभग 105 भारतीयों के लापता होने की रिपोर्ट है। 88 से ज्यादा लोगों को बचाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। नेपाल के रासुवा जिले में सबसे ज्यादा तबाही हुई है। भोटेकोशी नदी में अचानक पानी बढ़ने से घर, सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। 32 सुरक्षा कर्मी भी अभी संपर्क से बाहर बताए गए हैं। खराब मौसम और सड़क/संचार व्यवस्था टूटने के कारण राहत एवं बचाव कार्य में मुश्किल आ रही है। नेपाल सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बचाव अभियान में लगी हुई है।
सबसे महत्वपूर्ण बात: शुरुआती रिपोर्टों में मौतों का आंकड़ा 8–9 बताया गया था, लेकिन आज यह 100 से अधिक तक पहुंच चुका है। इसलिए अभी अंतिम आंकड़ा मानना ठीक नहीं होगा।
ये वो इमिग्रेशन आफिस है जहां से काठमांडू होकर कैलाश मानसरोवर के लिए जत्था जाता है। 400 के करीब लोग ईशा फाउंडेशन के द्वारा कैलाश मानसरोवर के यात्रा पर इसी रास्ते से गए थे जिसमें बाकी लोग काठमांडू में सुरक्षित हैं पर 77 लोगों का एक दल जो ईशा फाउंडेशन सद्गुरु जग्गी के द्वारा वहां जा रहा था, जिसमें सभी भारतीय लोग थे,वो लापता हैं।
ये जो पा़ंच मंजिल की चीनी ईमारत है ,इसके पुरे ऊपर से गाद की नदी बह गई। पर ये ईमारत क्षतिग्रस्त नही हुई है…बस इसका पार्किंग एरिया खत्म हो गया है। यहां जीवन के नाम पर अभी एक चीड़िया भी नही उड़ रही है ,पांच सौ के करीब लोग तो यही थे। वही नेपाल का रसुआ बाजार जहां 200 दुकानें थी,1000 लोग अकेले उस मार्केट से गायब है। अनुमान 10000 लोगों के मरने का है। पर जिस तरह से चीन ने 45 मिनट बाद अलर्ट का मैसेज भेजा था। ये संख्या दुगुनी या तीन गुनी चली जाए,तो अचंभा नही होगा।


