मुजफ्फरनगर । संघर्ष से सफलता के सफर में अनिल कुमार किस्मत के हमेशा से धनी माने जाते हैं । लगभग 22 साल पहले चरथावल अपने ननिहाल में रहकर बसपा में जमीनी कार्यकर्ता के तौर पर पूर्व मंत्री उमा किरण के साथ रह कर राजनीति के गुर सीखे थे । बसपा के सभी विधायक बगावत कर सपा सरकार में शामिल हुए, तो अनिल कुमार के जीवन उनकी किस्मत बदलने वाला मोड़ आया क्योंकि अनिल कुमार ने बसपा नहीं छोड़ी थी और इसके साथ ही अपनी राजनीति जमीन तैयार करने में लग गए थे।
48 बसंत देख चुके अनिल कुमार का जन्म सहारनपुर जिले के एक गांव ताहरपुर में हुआ था । मुजफ्फरनगर के चरथावल विधानसभा के गांव कसियारा में अपनी ननिहाल में रहते हुए इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त कर कृषि कार्य में लग गए थे। वर्ष 2002 में जब चरथावल सीट से उमा किरण विधायक बनी और अनिल कुमार उनके संपर्क में आ गए। उनके साथ रहकर राजनीति में धीरे धीरे सक्रिय होने लगे । जब उमा किरण बगावत कर सपा सरकार में मंत्री बनी, तो अनिल कुमार ने बसपा के जरिये ही अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का कार्य किया । जिस कारण 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने उन्हें चरथावल सुरक्षित सीट से प्रत्याशी घोषित कर दिया।अनिल कुमार चरथावल से पहली बार विधायक निर्वाचित हुए थे । इसके बाद वर्ष 2012 के चुनाव में चरथावल की जगह पुरकाजी को सुरक्षित सीट बना दिया गया, तो वह दूसरी बार यहां से विधायक बने। हालांकि तीसरी बार 2017 के चुनाव में बसपा के टिकट पर वह पुरकाजी सीट से चुनाव हार गए। इसके बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का दामन थामा लिyaऔर 2022 के विस चुनाव के लिए पुरकाजी सीट से दावेदारी मजबूत रखी। सपा-रालोद गठबंधन ने भी इन्हें रालोद के सिंबल पर चुनाव लड़ाया और वह जीत गए।लगभग एक महीना पहले ही जब सपा-रालोद का गठबंधन विखंडित हुआ, तो रालोद के सिंबल पर चुनाव जीतकर विधायक बने चंदन सिंह चौहान, मदन भैया के साथ ही अनिल कुमार की निष्ठा को लेकर सस्पेंस बना हुआ था।
चर्चा थी कि राज्यसभा सदस्य के चुनाव में ये विधायक क्रास वोटिंग कर सकते हैं, लेकिन किसी भी विधायक ने बगावत नहीं की। बल्कि रालोद में ही निष्ठा बनाए रखी। यही वजह है कि टिकाऊ निर्णय की वजह से एक तरफ चंदन सिंह चौहान को रालोद ने बिजनौर से लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया, तो अनिल कुमार को कैबिनेट मंत्री बनाकर इनाम दिया गया है।पुरकाजी विधायक अनिल का परिवार वर्तमान में मुजफ्फरनगर के पचैंडा रोड स्थित अंकित विहार में रहता है। उनके पिता वाणिज्यकर विभाग में रहे और माता भगवानदेई गृहिणी थीं। तीन भाईयों में वह सबसे बड़े हैं। दूसरे नंबर पर पंकज और तीसरे सुनील हैं। बहन सुनीला, रंजना और मोनिका हैं। उनकी शादी मेरठ से हुई और पत्नी वीरमति गृहिणी हैं। बड़ी बेटी सिमरन बीकाम कर रही हैं, जबकि दूसरी बेटी आस्था कक्षा नौ की छात्रा हैं।

