मुजफ्फरनगर। सनातन धर्म सभा में श्रीजी सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित 7 दिवसीय श्री राम कथा के चौथे दिन आज सीता स्वयंवर की दिव्य कथा का वर्णन
किया गया।
कथा व्यास परम श्रद्धेय श्री हिमेश शास्त्री जी महाराज ने कहा कि सीता स्वयंवर केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि धर्म, प्रेम और मर्यादा के मिलन का प्रतीक है। राजा जनक द्वारा शिव धनुष की शर्त रखना और श्रीराम द्वारा क्षण भर में धनुष भंग करना यह दर्शाता है कि अहंकार का धनुष केवल विनम्रता और धर्म से ही टूटता है।
महाराज जी ने कहा कि जब श्रीराम ने धनुष तोड़ा तो सीता जी ने वरमाला पहनाई, उस समय जनकपुरी में ऐसा उत्सव हुआ मानो समस्त सृष्टि प्रसन्न हो उठी हो। सीता जी साक्षात भक्ति हैं और राम साक्षात भगवान हैं, जब भक्ति और भगवान का मिलन होता है तभी जीव का कल्याण होता है।
सीता स्वयंवर के प्रसंग का सजीव वर्णन सुनकर पंडाल में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालु “जय श्री राम” और “जय सियाराम” के जयघोष से गूंज उठा।
आज की कथा में सुनील गर्ग एडवोकेट, हरजीत कालरा, रवींद्र सैनी, विपिन शर्मा, पीयूष शर्मा, संजीव धीमान, लव सिंघल, अभिनव अग्रवाल, ईश कौशल, सुभाष चंद्र, ललित अरोरा आदि उपस्थित रहे।


