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विद्युत अभियंता एवं कर्मचारियों ने सभी नागरिकों से की विनम्र अपील….

मुजफ्फरनगर।

*44 डिग्री का टॉर्चर: क्या इंसान, क्या मशीन थोड़ा धैर्य, थोड़ा सहयोग!*

प्रिय शहरवासियों व ग्रामवासियों
आज हमारा पूरा प्रदेश और शहर सूरज की भीषण तपिश से झुलस रहा है। पारा 43℃ के पार जा चुका है, रातें 30℃ पर उबल रही हैं। इस असहनीय माहौल में हर कोई अपने घरों में एसी और कूलर के सहारे राहत ढूंढ रहा है। बिजली की मांग इतिहास के सारे रिकॉर्ड तोड़कर के पार जा चुकी है।
लेकिन इस संकट के बीच, हमें एक कड़वी मगर सच्ची हकीकत को समझना होगा।

1. *मशीनें भी थकी हैं, उनकी भी एक सीमा है*

जिस तरह हाड़-मांस के बने हम इंसानों की सहने की एक निश्चित क्षमता होती है, ठीक वैसे ही लोहे और तारों से बनी इन मशीनों की भी एक सीमा होती है। 44 डिग्री की झुलसाती धूप में ये ट्रांसफॉर्मर और केबल बिना रुके, लगातार सुलग रहे हैं। जब क्षमता से अधिक लोड पड़ता है, तो ये मशीनें भी ‘हांफने’ लगती हैं और आखिरकार दम तोड़ देती हैं। यह समस्या किसी एक मोहल्ले या शहर की नहीं है, बल्कि इस रिकॉर्ड-तोड़ गर्मी में पूरे देश की है।

2. *वो भी किसी के बेटे, किसी के पिता हैं*

सोचिए, जब हम अपने घरों में कुछ मिनट के लिए बिजली चले जाने पर छटपटा उठते हैं, तब बिजली विभाग के कर्मचारी इस जानलेवा धूप में, सड़कों पर, खंभों पर चढ़कर सुलगते हुए ट्रांसफॉर्मरों और फॉल्ट वाले केबलों को ठीक कर रहे होते हैं।
वे भी इसी समाज का हिस्सा हैं।
उनके शरीर में भी वही खून और पानी है जो इस गर्मी में सूख रहा है।
वे अपनी जान जोखिम में डालकर, अपनों को घर पर छोड़कर, सिर्फ इसलिए जूझ रहे हैं ताकि आपके घर का पंखा चल सके।

3. *आक्रोश नहीं, आत्मीयता की ज़रूरत है*

बिजली गुल होने पर हमारा गुस्सा आना स्वाभाविक है, लेकिन उस गुस्से को उन बिजली कर्मियों पर निकालना जो खुद इस व्यवस्था को सुधारने में दिन-रात एक किए हुए हैं, कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है। वे जादूगर नहीं हैं, वे भी इस व्यवस्था और प्रकृति की मार से जूझ रहे आम इंसान हैं।

*एक मार्मिक अपील:*

जब अगली बार बिजली जाए, तो सब्र का दामन थामें। विभाग के कर्मचारियों से विवाद करने के बजाय, उनके प्रति थोड़ी सहानुभूति और आदर रखें। इस अप्रत्याशित संकट के समय में पैनिक (घबराहट) न फैलाएं।

*हम क्या कर सकते हैं? (एक ज़िम्मेदार नागरिक का फर्ज़)*

* अनावश्यक लोड कम करें: जिस कमरे में कोई न हो, वहां के एसी, कूलर और लाइट तुरंत बंद कर दें।
* पीक आवर्स में सहयोग दें: दोपहर और रात के समय जब बिजली की मांग सबसे ज़्यादा होती है, तब भारी बिजली उपकरणों (जैसे वॉशिंग मशीन, पानी का पंप, या ई-व्हीकल चार्जिंग) का उपयोग टालें।
* स्वीकृत लोड का ध्यान रखें: चोरी छिपे या बिना लोड बढ़वाए भारी उपकरण न चलाएं, क्योंकि आपका एक गलत कदम पूरे मोहल्ले को अंधेरे में धकेल सकता है।

वक्त कठिन है, मौसम बेदर्द है, लेकिन हमारा आपसी तालमेल और धैर्य इस जंग को आसान बना सकता है। बिजली कर्मियों के हौसले को तोड़िए मत, इस भीषण गर्मी में उनका संबल बनिए!
शांति बनाए रखें, ज़िम्मेदारी निभाएं।

Taja Report
Author: Taja Report

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