हरिद्वार। सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार में श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। तड़के सुबह से ही हर की पैड़ी सहित विभिन्न प्रमुख गंगा घाटों पर स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से आए श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। हर की पैड़ी, ब्रह्मकुंड, मालवीय घाट, सुभाष घाट, कुशा घाट और अन्य स्नान स्थलों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-अर्चना और दान-पुण्य के माध्यम से इस विशेष पर्व को श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाते दिखाई दिए। पूरे शहर में आध्यात्मिक वातावरण और भक्ति का माहौल बना रहा।
सोमवती अमावस्या स्नान पर्व को सुरक्षित, व्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह सतर्क एवं सक्रिय नजर आया। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर ने स्वयं विभिन्न घाटों एवं संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। दोनों अधिकारियों ने मौके पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। प्रशासन द्वारा मेले के प्रभावी संचालन के लिए पूरे क्षेत्र को विभिन्न सेक्टरों में विभाजित किया गया था। प्रत्येक सेक्टर में नोडल अधिकारी और सेक्टर मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई, जिन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमणशील रहकर स्थिति की निगरानी करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों को विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखने के लिए कहा गया कि किसी भी स्थान पर अत्यधिक भीड़ एकत्रित न होने पाए तथा श्रद्धालुओं की आवाजाही निर्बाध बनी रहे।
“सोमवती अमावस्या के अवसर पर हर की पैड़ी सहित हरिद्वार के प्रमुख घाटों पर गंगा स्नान करते श्रद्धालु और सुरक्षा व्यवस्था संभालती पुलिस।”
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मेला क्षेत्र के चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी। पुलिस कर्मियों द्वारा घाटों, मुख्य मार्गों, पार्किंग स्थलों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी गई। इसके अतिरिक्त सादे वस्त्रों में भी पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। मेला क्षेत्र की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का भी व्यापक उपयोग किया गया। विभिन्न स्थानों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन कैमरों के माध्यम से भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखी गई। कंट्रोल रूम से पूरे मेला क्षेत्र की स्थिति पर लगातार निगरानी की जा रही थी, जिससे आवश्यकतानुसार त्वरित निर्णय लिए जा सकें।
आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और एम्बुलेंस सेवाओं को अलर्ट मोड पर रखा गया था। घाटों पर सुरक्षा बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई तथा सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से श्रद्धालुओं को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाते रहे। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया। शहर के विभिन्न मार्गों पर आवश्यकतानुसार डायवर्जन की व्यवस्था की गई तथा बाहरी जनपदों से आने वाले वाहनों के लिए निर्धारित पार्किंग स्थल चिन्हित किए गए। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पार्किंग स्थलों से शटल सेवाओं का संचालन भी किया गया, जिससे उन्हें स्नान स्थलों तक पहुंचने में आसानी हो सके।


