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मां लक्ष्मी का वरदान लेकर आएगी श्री कमला पुरुषोत्तम एकादशी

*श्री कमला पुरुषोत्तम एकादशी महात्म्य*

(अधिक ज्येष्ठ मास, कृष्ण पक्ष)

शास्त्रों में अधिक मास को पुरुषोत्तम मास कहा गया है। यह मास भगवान विष्णु के समस्त अवतारों और दिव्य स्वरूपों में श्रेष्ठ पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण को अत्यन्त प्रिय है। इस मास में आने वाली श्री कमला पुरुषोत्तम एकादशी विशेष रूप से माता कमला (महालक्ष्मी) तथा भगवान पुरुषोत्तम की संयुक्त कृपा प्रदान करने वाली मानी गई है।

*1. इस एकादशी का नाम “कमला” क्यों?*

“कमला” माता महालक्ष्मी का एक दिव्य नाम है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की आराधना करने से भक्त को केवल भौतिक समृद्धि ही नहीं, बल्कि भगवद्भक्ति, सद्बुद्धि और अन्तःकरण की पवित्रता भी प्राप्त होती है। इसलिए इसे कमला पुरुषोत्तम एकादशी कहा गया है।

*2. अधिक मास में इसका विशेष महत्व*

सामान्य एकादशियों का फल तो महान है ही, परन्तु पुरुषोत्तम मास में आने वाली एकादशी का पुण्य अनेक गुना बढ़ जाता है। पद्मपुराण आदि ग्रंथों में वर्णन है कि इस मास में किया गया जप, तप, दान, व्रत और भगवद्भजन अक्षय फल देने वाला होता है।

*3. इस व्रत के फल पूर्व जन्मों के पापों का क्षय होता है।*

मन की चंचलता और विकार कम होते हैं।

दरिद्रता, बाधाओं और दुर्भाग्य का नाश होता है।

घर में सुख, शान्ति और आध्यात्मिक वातावरण बढ़ता है। भगवान के चरणों में श्रद्धा और भक्ति दृढ़ होती है। अन्तकाल में भगवान की कृपा से उत्तम गति प्राप्त होती है।

*4. इस दिन क्या विशेष करें?*

यदि कोई भक्त इस दिन निम्न कार्य श्रद्धापूर्वक करे तो शीघ्र भगवद्भक्ति की प्राप्ति होती है—

-प्रातः स्नान कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पूजन करें।

-तुलसी पत्र भगवान को अर्पित करें।

-“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें।

-श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीमद्भागवत महापुराण अथवा विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

-यथाशक्ति उपवास या फलाहार करें।

-गौसेवा, संतसेवा तथा दान करें।

-सायंकाल भगवान के नाम का संकीर्तन करें।

*5. भक्ति प्राप्ति का सरल उपाय*

अनेक वैष्णव आचार्यों ने बताया है कि पुरुषोत्तम मास में यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन कुछ समय भगवान के नाम का जप करे और इस एकादशी को विशेष रूप से हरिनाम संकीर्तन में लगाए, तो उसके हृदय में भक्ति का अंकुर शीघ्र प्रकट होता है।

*6. विशेष संदेश*

धन, यश, स्वास्थ्य और सांसारिक सुख तो इस व्रत के सहायक फल हैं; परन्तु इसका सर्वोच्च फल है — भगवान पुरुषोत्तम के चरणों में प्रेम और शरणागति की प्राप्ति।

*एकादशी संकल्प*

_*”हे पुरुषोत्तम प्रभु! हे माता कमला! मैं आपकी प्रसन्नता के लिए इस एकादशी व्रत का पालन करता हूँ। कृपया मेरे हृदय में निष्काम भक्ति, नाम-रुचि और सदैव आपकी स्मृति प्रदान करें।”*_

*इस बार इस एकादशी*

दिनांक: Thursday, 11 June 2026

*पारण:* अगले दिन सूर्योदय के बाद 9:23 AM तक।

Taja Report
Author: Taja Report

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