देश के युवाओं को किसी आन्दोलन से जुड़ने से पहले तथ्यों की पुष्टि करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए- अशोक बालियान,चेयरमैन,पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन

नई दिल्ली, 07 जून। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दिपके ने 29 मार्च 2026 को उन्होंने दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद के समर्थन में पोस्ट लिखते हुए पूछा था कि उन्हें बिना मुकदमे के पांच साल तक जेल में क्यों रखा गया। इसी तरह उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का भी विरोध किया था। वर्ष 2020 में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हुए आंदोलनों के दौरान भी अभिजीत डिपके सक्रिय रहे। उन्होंने CAA का विरोध किया था। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के इनपुट्स के आधार पर भी इसके कुछ हैंडल्स को देश की सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए ब्लॉक किया गया है।
अभिजीत दिपके वर्ष 2020 से 2022 के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया और डिजिटल अभियान टीम का एक प्रमुख हिस्सा थे।
भारत में उन वर्गों का इकट्ठा होना एक चिंताजनक प्रवृत्ति को उजागर करता है, जिसमें युवाओं के कुछ वर्गों को शामिल मुद्दों को पूरी तरह से समझे बिना सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से लामबंद किया जा सकता है।
दुनिया के BBC, CNN, NBC न्यूज, CBS न्यूज, अल जजीरा और द गार्जियन जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने कॉकरोच जनता पार्टी को भारत में युवाओं की नाराजगी और डिजिटल प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया।
सौरव दास को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का मुख्य प्रवक्ता नियुक्त किया गया है। सौरव दास की सोच लेफ्ट-लीनिंग (वामपंथ की ओर झुकी हुई) है और उनके पुराने संपर्कों (जैसे उमर खालिद से दोस्ती) का हवाला देकर विरोधी उन्हें एक खास राजनीतिक एजेंडे के तहत सरकार विरोधी नैरेटिव चलाने वाला बताते हैं।
दुसरे प्रवक्ता विजेता दहिया है और विजेता दहिया ने अतीत में हिंदू देवी-देवताओं, प्रतीकों और परंपराओं को लेकर विवादास्पद टिप्पणियां की हैं। तीसरे प्रवक्ता आशुतोष रांका है और आशुतोष रांका अतीत में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्णकालिक सदस्य और नेशनल मीडिया चैनल्स पर पार्टी के लिए लिखने वाले सहयोगियों में शामिल रहे हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से NEET-UG पेपर लीक विवाद और शिक्षा व्यवस्था में कमियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर 6 जून 2026 को हुआ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का आंदोलन अब समाप्त हो गया है। लेकिन इसके संस्थापक के राजनीतिक संबंध, पुराने विवादित बयान, विपक्षी दलों का खुला समर्थन और वामपंथी नेटवर्क की सक्रियता कई प्रश्न खड़े करते हैं। इस आन्दोलन में वांगचुक और कम्युनिस्ट समूहों की भागीदारी से यह खतरा रहा है कि ध्यान शैक्षिक चिंताओं से हटकर व्यापक राजनीतिक एजेंडों की ओर चला जाएगा।
पीजेंट के चेयरमैन अशोक बालियान का तर्क है कि युवाओं को सार्वजनिक मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने और तथ्यों की पुष्टि करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, न कि केवल व्यक्तियों या रुझानों का अनुसरण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

