कानपुर। तहलका मचा देने वाले किडनी रैकेट के मुख्य किरदारों, डॉ. अफजल और परवेज शैफी के नोटों की गड्डी वाले वीडियो ने पूरे नेक्सस की पोल खोलकर रख दी है। वायरल वीडियो होटल के कमरे का है, जिसमें नोटों की गड्डियां दिख रही हैं। बैड पर बिछी पांच पांच सौ के नोटों की गड्डियों पर दोनों पडे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में आरोपी होटल के कमरे में बेड पर रखे नोटों के बंडलों के साथ नजर आ रहे हैं। यह वीडियो गवाही दे रहा है कि इंसानी अंगों के धंधे में लाखों का खेल किया जा रहा था। अधिकारियों के मुताबिक, प्रत्यारोपण के मामलों को अक्सर गॉलब्लैडर के इलाज के रूप में दिखाया जाता था। पुलिस ने कानपुर के एक बिचौलिए साहिल की पहचान इस गिरोह की अहम कड़ी के रूप में की है, जो कथित तौर पर बाजार दर से लगभग आधी कीमत पर किडनी का प्रबंध कर दाता और मरीज को जोड़ता था। जांच में सामने आया है कि इस गिरोह का सदस्य परवेज शैफी पहले भी गाजियाबाद में लूट और डकैती जैसे संगीन मामलों में जेल की हवा खा चुका है। वह इस रैकेट का ‘लॉजिस्टिक्स हेड’ था, जिसका मुख्य काम दिल्ली और गाजियाबाद से डॉक्टरों और विशेषज्ञों की टीम को कानपुर लाने के लिए गाड़ियां मुहैया कराना था। पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपियों को आहूजा हॉस्पिटल से घेराबंदी कर पकड़ा था। बताया जा रहा है कि परवेज ही वह शख्स था जो पूरी टीम को लेकर अस्पताल पहुंचा था। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि इस नेटवर्क के तार और किन-किन बड़े अस्पतालों और सफेदपोश लोगों से जुड़े हैं। कानपुर पुलिस की कई टीमें अब दिल्ली और गाजियाबाद में छापेमारी कर रही हैं। देखना यह है कि डॉ. अफजल और शातिर अपराधी परवेज की जुबान खुलने के बाद और कितने बड़े नाम बेनकाब होते हैं।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि शुरू में जिन चार मुख्य आरोपियों को चिकित्सक समझा जा रहा था, वे अयोग्य चिकित्सक निकले। इनमें रोहित तिवारी उर्फ राहुल (तकनीशियन), अमित उर्फ अनुराग (फिजियोथेरेपिस्ट), अफजल (फार्मेसी ऑपरेटर) और वैभव (डेंटिस्ट) शामिल हैं। उन्होंने बताया कि चारों फिलहाल फरार हैं। जांच में अब तक कम से कम छह अवैध प्रत्यारोपण की पुष्टि हुई है, जिनमें से पांच अहूजा अस्पताल में और एक मेडलाइफ सुविधा से जुड़ा पाया गया है।

