मुजफ्फरनगर। प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीमों ने प्रदेश के 13 जिलों में संचालित चैरिटेबल ब्लड बैंकों पर एक साथ धावा बोल दिया। जांच में जो सच सामने आया है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। बिना टेस्टिंग के खून की सप्लाई से लेकर फर्जी रिकॉर्ड्स तक, मानवता को शर्मसार करने वाली लापरवाही के चलते सात ब्लड केंद्रों के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है, हैरानी की बात ये है कि इनमें चार मुजफ्फरनगर के ही ब्लड बैंक शामिल है।
जांच टीमों को इन केंद्रों पर ऐसी खामियां मिलीं जो किसी भी स्वस्थ व्यक्ति को मौत के मुंह में धकेल सकती थीं। अधिकारियों के मुताबिक, इन सेंटर्स पर न तो मानक के अनुरूप टेस्ट (जो एचआईवी और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों की जांच के लिए अनिवार्य है) हो रहे थे और न ही खून को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड चेन का पालन किया जा रहा था। इनमें मुख्य अनियमितताएं ये हैं:–
बल्क ट्रांसफर का खेल: बिना किसी परीक्षण रिकॉर्ड के भारी मात्रा में खून इधर-उधर भेजा जा रहा था।
गायब स्टाफ: तकनीकी कर्मचारी और प्रभारी चिकित्सा अधिकारी लंबे समय से ड्यूटी से नदारद थे।
फर्जी रिकॉर्ड: रक्तदाता और रक्त प्राप्त करने वाले मरीजों का कोई पुख्ता विवरण नहीं मिला। छापेमारी के दौरान इन सात ब्लड बैंकों पर गिरी गाज अचिंत्य चेरिटेबल ब्लड सेंटर, फ्रेंड्स कालोनी, इटावा
जीवांश चेरिटेबल ब्लड सेंटर, विकास भवन के सामने, मेरठ रोड, मुज़फ्फरनगर
सर्वोदया चेरिटेबल ब्लड सेंटर, भोपा रोड, मुज़फ्फरनगर
मानव सेवा चेरिटेबल ब्लड सेंटर, आइटीआइ चौराहा, आगरा रोड, इटावा
एसडी मेडिकल इंस्टिट्यूट, भोपा रोड, मुज़फ्फरनगर
दुर्गा चेरिटेबल ब्लड सेंटर, रुड़की रोड, मुज़फ्फरनगर
लॉइन्स चेरिटेबल ब्लड सेंटर, मिनी बाइपास रोड, बरेली
मुख्यालय द्वारा गठित अंतर-जनपदीय टीमों ने मुजफ्फरनगर में छह, बरेली में छह, इटावा में पांच, रायबरेली में पांच, मुरादाबाद में पांच, कुशीनगर में दो और आगरा, जौनपुर, अमरोहा, बलरामपुर, बागपत, मैनपुरी व भदोही में 1-1 केंद्र की सघन जांच की। कुल 36 केंद्रों की पड़ताल की गई, जिनमें से सात को बंद कर दिया गया है और बाकी केंद्रों को उनकी कमियों के लिए ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया है।
जनता के लिए एडवाइजरी:
विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन ब्लड बैंकों को बंद किया गया है, वहां मौजूद ब्लड स्टॉक के सुरक्षित निस्तारण के लिए अलग से गाइडलाइन जारी की गई है, ताकि संक्रमित या खराब खून किसी भी सूरत में बाजार में न पहुंच सके।


