मुजफ्फरनगर। शहर के निकटवर्ती गाँव में कर्ज और होने वाली धोखाधड़ी की कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए एक बुजुर्ग द्वारा खुद के ही अपहरण की साजिश रचने का एक सनसनी खेज मामला प्रकाश में आया है।
वही थाना खालापार पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे का पर्दाफाश कर दिया है । पिछले 33 दिनों से गायब बताए जा रहे बुजुर्ग को अमृतसर स्थित सत्संग व्यास से बरामद कर लिया है। अपहरण की साजिश रचियता बुजुर्ग पुलिस की आंखों में धूल झोंककर धार्मिक स्थल की आड़ में छिपा हुआ था । जिसे रुड़की रोड स्थित एक सत्संग में आने पर दबोच लिया गया।
उक्त मामले की जानकारी देते हुए पुलिस ने बताया कि गत 23 अप्रैल 2026 को अनिल कुमार निवासी सुजडू, थाना खालापार ने पुलिस को एक तहरीर दी थी। जिसमें उसने आरोप लगाया था कि उसके पिता महेश कुमार रहस्यमय परिस्थितियों में घर से लापता हो गए हैं । किसी ने उनका अपहरण कर लिया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल बीएनएस की धारा 140(3) के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।
एसएसपी संजय कुमार वर्मा के सख्त निर्देश पर एसपी सिटी अमृत जैन और एएसपी/सीओ सिटी सिद्धार्थ मिश्रा के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। थाना प्रभारी बबलू सिंह की टीम ने जब सर्विलांस और मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया, तो परतें खुलती चली गईं। मंगलवार, 26 मई को सटीक सूचना पर पुलिस ने महेश कुमार को रुड़की रोड स्थित एक सत्संग परिसर से उस वक्त दबोच लिया जब वह वहां पहुंचा था।
पुलिस कस्टडी में आते ही महेश कुमार ने जो कबूलनामा किया, उसे सुनकर अधिकारी भी हैरान रह गए। महेश ने बताया कि उसने साल 2011 में अपनी एक दुकान का बैनामा किसी अन्य व्यक्ति के नाम कर दिया था। दो साल पहले उसने उसी दुकान को दोबारा धोखाधड़ी से किसी दूसरे खरीदार को बेच दिया और बयाने के तौर पर 11 लाख रुपये ऐंठ लिए। अब दूसरा खरीदार लगातार दुकान का बैनामा करने या पैसे वापस करने का दबाव बना रहा था। भारी-भरकम रकम वापस न करनी पड़े और जेल जाने से बचा जा सके, इसलिए महेश ने अपने ही बेटे अनिल से पुलिस में अपहरण की झूठी कहानी लिखवा दी। इसके बाद वह सीधे अमृतसर के ‘सत्संग व्यास’ में जाकर छिप गया ताकि कोई उस पर शक न करे। वह 25 मई को मुजफ्फरनगर लौटा था, लेकिन पुलिस की पैनी नजरों से बच नहीं सका।


