Access denied नारी परिवार की प्रथम गुरु होती है – ब्रह्माकुमारी जयंती - Taja Report

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नारी परिवार की प्रथम गुरु होती है – ब्रह्माकुमारी जयंती

मुजफ्फरनगर। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, केशवपुरी द्वारा ब्रह्माकुमारी मेडिटेशन सेंटर बामनहेरी

में “महिला सशक्तिकरण — श्रेष्ठ समाज की आधारशिला” विषय पर एक प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में यशि गर्ग (खण्ड कार्यवाहिका, राष्ट्रीय सेविका समिति, चरथावल) उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं के सशक्त होने से ही समाज और राष्ट्र का समग्र विकास संभव है।

कार्यक्रम में पूर्व प्रोफेसर डॉ चित्रा चौधरी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए महिलाओं को शिक्षा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के माध्यम से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता राजयोगिनी जयंती दीदी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन मे कहा कि नारी केवल परिवार की ही नहीं बल्कि पूरे समाज की आधारशिला है। नारी के अंदर प्रेम, करुणा, सहनशीलता और त्याग जैसे दिव्य गुण स्वाभाविक रूप से मौजूद होते हैं। जब नारी अपनी आंतरिक शक्ति और आत्मसम्मान को पहचान लेती है, तो वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरक शक्ति बन जाती है।

उन्होंने कहा कि आज के समय में महिला सशक्तिकरण केवल अधिकार प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने अंदर की आध्यात्मिक शक्ति को जागृत करना भी उतना ही आवश्यक है। जब महिला आत्मज्ञान और राजयोग के माध्यम से अपने मन को शक्तिशाली बनाती है, तो वह हर परिस्थिति का सामना धैर्य और आत्मविश्वास के साथ कर सकती है।

राजयोगिनी जयंती दीदी ने कहा कि नारी परिवार की प्रथम गुरु होती है। बच्चे सबसे पहले मां से ही संस्कार सीखते हैं। यदि मां स्वयं सकारात्मक, संस्कारी और आत्मिक रूप से मजबूत होगी, तो वह आने वाली पीढ़ी को भी श्रेष्ठ संस्कार दे सकेगी। इसलिए महिलाओं को अपने मानसिक और आध्यात्मिक विकास पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में तनाव और नकारात्मकता बढ़ती जा रही है। ऐसे समय में राजयोग मेडिटेशन महिलाओं को मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक सोच प्रदान करता है। जब महिला स्वयं खुश और शांत रहती है, तभी वह परिवार और समाज में भी खुशियों का वातावरण बना सकती है।

अपने उद्बोधन के अंत में उन्होंने सभी *महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि प्रत्येक नारी अपने अंदर छिपी दिव्य शक्तियों को पहचानें, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और समाज में प्रेम, शांति और संस्कारों की ज्योति प्रज्वलित करें।

नारी में अपार शक्तियां और गुण निहित हैं। जब नारी आत्मिक शक्ति को पहचान लेती है, तो वह परिवार और समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।

कार्यक्रम के दौरान प्रेरणादायी उद्बोधन के साथ-साथ दिव्य गीत-संगीत के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम में क्षेत्र की अनेक महिलाओं और गणमान्य लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

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Author: Taja Report

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