मुजफ्फरनगर। केंद्र सरकार द्वारा खरीफ फसलों के MSP निर्धारण से पूर्व कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की मीटिंग में अशोक बालियान, चेयरमैन, पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन,धर्मेंद्र मलिक राष्ट्रीय प्रवक्ता भाकियू अराजनैतिक ने किसान हित में सुझाव दिए।
दिल्ली में कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) द्वारा खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने से पूर्व विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई है। इस बैठक में पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन अशोक बालियान व भाकियू (अ) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक को आमंत्रित किया गया था।
श्री अशोक बालियान ने कहा कि MSP निर्धारण केवल लागत का प्रश्न नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय स्थिरता और फसल विविधीकरण से जुड़ा हुआ विषय है। और
वास्तविक लागत (C2) व वास्तविक लागत (D अर्थात कटाई के बाद की लागत ) के आधार पर लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जाए।
बालियान ने यह भी कहा कि एमएसपी तय करते समय न्यूनतम सुरक्षा स्तर वाली फसलें, जोखिम व मूल्य अस्थिरता वाली फसलें व उच्च जोखिम, नाशवान या रणनीतिक फसलों के आधार पर लाभ प्रतिशत क्रमशः50 प्रतिशत, 60-70 प्रतिशत व 70-100 प्रतिशत सुनिश्चित किया जाए।
धर्मेन्द्र मलिक ने कहा कि जिन फसलों पर MSP घोषित होता है, उनकी प्रभावी खरीद की गारंटी हो।
जिन फसलों पर MSP घोषित नहीं है, उनके लिए बाजार हस्तक्षेप योजना को मजबूत किया जाए।
क्षेत्रीय लागत अंतर को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक मूल्य निर्धारण किया जाए।
आयात-निर्यात नीति को MSP नीति के अनुरूप संतुलित किया जाए, ताकि किसानों को नुकसान न हो।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा किसान संगठनों से पूर्व विचार-विमर्श की पहल सकारात्मक है और इससे पारदर्शिता व विश्वास बढ़ेगा। पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयर मेन अशोक बालियान व भाकियू (अ) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने किसानों के हितों की मजबूती के लिए ठोस एवं रचनात्मक सुझाव प्रस्तुत किए।
बैठक में रत्न लाल डागां सलाहकार, प्रेम चंद सदस्य, डॉ सीमा सलाहकार विवेक शुक्ला सलाहकार,दिव्या शर्मा निदेशक,सिरीक जॉर्ज सचिव (CACP) शामिल रहे
बैठक में किसानों के संगठन भारतीय किसान सभा,भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक,भारतीय किसान संघ, किसान महापंचायत सहित कई किसान संगठनों ने हिस्सा लिया
श्री विजय पॉल शर्मा
चेयरमैन कृषि लागत और मूल्य आयोग,
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली।
विषय- खरीफ विपणन सत्र 2026-27 हेतु न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारण में सुधार एवं किसानों की मांगों के संबंध में।
महोदय,
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) किसानों की आय सुरक्षा का प्रमुख आधार है, जिसकी सिफारिश कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) करता है। वर्तमान में MSP निर्धारण में A2, A2+FL और C2 लागत के आधारों का उपयोग होता है, लेकिन किसानों की व्यापक मांग है कि इस फॉर्मूले में संरचनात्मक सुधार किया जाए। पिछले एक वर्ष के अध्ययन में यह पाया गया है कि किसानों की रबी,खरीफ दोनों में ही किसानों को उनकी फसल का घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिला है। खास बात यह है कि खाद्य तेल और दालों में हमारी आयात पर निर्भरता है जबकि घरेलू उत्पादन गिर रहा है और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) भी नहीं मिल पा रहा है।पिछले वर्ष खरीफ में किसानों को मंडियों में-35% से – 5% तक मिले हैं
उत्तर प्रदेश में किसानों का धान 1600रू कुंतल बिक रहा है
भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक आज दिनाँक 24 फरवरी 2026 को खरीफ फसलों के मूल्य निर्धारण हेतु आयोजित किसानों के साथ बैठक में हम निम्नलिखित मांगें आपके समक्ष गंभीरतापूर्वक प्रस्तुत करते हैं। वर्तमान परिस्थितियों में बढ़ती लागत, जलवायु संकट एवं बाजार अस्थिरता को देखते हुए एमएसपी निर्धारण में संरचनात्मक सुधार अत्यंत आवश्यक है।
1. फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करते समय C2 लागत में 100% लाभ जोड़कर घोषित किया जाय।घोषित मुल्य को कानूनी संरक्षण प्रदान दिया जाय।
2. फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने और चावल व गेहूँ के प्रभुत्व को कम करने के लिये सरकार धीरे-धीरे MSP समर्थन हेतु पात्र फसलों की सूची का विस्तार कियाजाय। जिससे किसानों को अधिक विकल्प मिलेंगे और बाज़ार की मांग के अनुरूप फसलों की खेती को बढ़ावा मिलेगा।
3. प्रत्येक फसल के लिए निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पूरे देश में एक समान है। हालांकि, फसलों की उत्पादन लागत राज्यों के अनुसार अलग-अलग होती है। जिससे हर राज्य के किसान का लाभ अलग अलग है। मुल्य तय करते समय राज्य से प्राप्त आंकड़ों से जिस कार्य हेतु (मजदूरी,निवेश,जमीन का किराया)जिस राज्य का अधिकतम मूल्य दिया गया है उसका उपयोग किया जाये
4. खरीद केंद्रों पर सुविधाओं का विस्तार अनिवार्य है,जिसमें फसलों को सुखाने के लिए ड्रायर एवं स्थान, सफाई के लिए बड़े पंखों, आकस्मिक भुगतान,इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटे आदि को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाय।
5. खरीद के 24 घंटों के अंदर किसानों का भुगतान सुनिश्चित किया जाय
6. सस्ता आयात किसानों को एमएसपी दिए जाने से रोकता है।तिलहन,दलहन जैसी फसलों का सस्ता आयात एमएसपी से नीचे की कीमतों का कारण बनता है, जिसे रोकने के लिए सरकारी हस्तक्षेप की आवश्यकता है। किसानों को लाभकारी आर्थिक ढांचा प्रदान करना और व्यापार नीतियों में स्थिरता सुनिश्चित करना समय की मांग है।
7. घोषित एमएसपी वृद्धि अक्सर थोक मूल्य सूचकांक (WPI) से भी कम होती है, जिससे किसानों की वास्तविक आय नहीं बढ़ती।कीमतें निर्धारित करते समय थोक मूल्य सूचकांक को भी ध्यान में रखते हुए कीमतें निर्धारित की जाय
8. खरीफ फसलों का उचित मूल्य निर्धारण केवल आर्थिक प्रश्न नहीं, बल्कि करोड़ों किसानों की आजीविका और देश की खाद्य सुरक्षा से जुड़ा विषय है। आशा है कि आयोग द्वारा उपरोक्त विषयों को गंभीरता से स्वीकार करते हुए न्यायपूर्ण एमएसपी घोषित की जाएगी। जिससे किसानों के जीवन स्तर में सुधार होगा।


