मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर के गन्ना किसानों की दशकों पुरानी मांग आखिरकार पूरी हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने मोरना चीनी मिल द गंगा किसान सहकारी चीनी मिल लिमिटेड के विस्तार, तकनीकी उन्नयन और आधुनिकीकरण के लिए ₹261.91 करोड़ की भारी-भरकम राशि को ऐतिहासिक स्वीकृति प्रदान की है। इस निर्णय से मोरना, मीरापुर और आसपास के क्षेत्रों के हजारों किसान परिवारों के चेहरे खिल उठे हैं।इस बड़ी उपलब्धि के पीछे बिजनौर-मुजफ्फरनगर क्षेत्र के सांसद चंदन चौहान की सक्रियता और निरंतर पैरवी रही है। उन्होंने संसद से लेकर सड़क तक और मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकातों में मोरना मिल की जर्जर स्थिति और किसानों की पेराई संबंधी दिक्कतों को प्रमुखता से उठाया। रालोद प्रमुख व केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के कुशल मार्गदर्शन में इस प्रस्ताव को शासन स्तर पर तेजी से गति मिली, जिसका परिणाम आज किसानों के सामने है।सरकारी आदेश के अनुसार, इस धनराशि से मिल की क्षमता और तकनीक में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे:पेराई क्षमता में वृद्धि: मिल की वर्तमान पेराई क्षमता को 2500 से बढ़ाकर 5000 प्रतिटन करने का लक्ष्य है।
तकनीकी उन्नयन: मिल में अत्याधुनिक मशीनों और ‘लेटेस्ट टेक्नोलॉजी’ का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे चीनी की रिकवरी बढ़ेगी।
रोजगार सृजन: मिल के विस्तार से स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सैकड़ों नए रोजगार पैदा होंगे।
किसानों को राहत: पेराई क्षमता बढ़ने से गन्ना डंप होने की समस्या खत्म होगी और भुगतान में तेजी आएगी।
सरकार द्वारा जारी वित्तीय ढांचे के अनुसार, इस प्रोजेक्ट की कुल लागत ₹27,565.43 लाख (करीब 275 करोड़) आंकी गई है, जिसमें से ₹26,191.00 लाख (₹261.91 करोड़) की सरकारी सहायता को हरी झंडी दे दी गई है। यह राशि 50% ऋण और 50% अनुदान के रूप में व्यवस्थित की जा सकती है।
क्षेत्रीय विकास की नई इबारत
सांसद चंदन चौहान ने इस निर्णय को ‘मीरापुर और मोरना के किसानों की जीत’ बताया है। उन्होंने कहा कि “मोरना क्षेत्र के किसान लंबे समय से पेराई में देरी से परेशान थे। हमने चुनावी वादे को निभाया है और योगी सरकार ने मोरना के किसानों को सुरक्षित भविष्य का तोहफा दिया है।” प्रदेश सरकार के इस फैसले पर ख़ुशी जाहिर की है और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है।


