मुजफ्फरनगर। यह कहानी केवल मुजफ्फरनगर की नहीं है यह हरियाणा उत्तराखंड उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश बिहार झारखंड कोलकाता कर्नाटक समेत पता नहीं कहां-कहां की है।
यही प्रक्रिया है, वही 1997 में सहारा द्वारा बनाई हुई शेल कंपनियों ने देश के 217 शहरों में करोड़ों निवेशको की गाढ़े खून पसीने की कमाई से यह जमीन खरीदी थी।
सभी कंपनियां एक लाख की पूंजी से शुरू हुई थी सभी कंपनियों ने फर्जी डायरेक्टर के माध्यम से यह जमीन खरीदी किसी भी कंपनी की एजीएम बैठक और बैलेंस शीट 2021 के बाद नजर नहीं आई और जितने भी संपत्ति बेची गई वह 2021 के बाद ही बेची गई
बताया जाता है ऐसी कंपनियां हजारों हैं जिनका इस्तेमाल सहारा ग्रुप ने किया
आज जिन जमीनों को सहारा बेच रहा है वह उसकी नहीं है निवेश को की है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से सेबी के पास बंधक है।
मुजफ्फरनगर की जमीन भले ही बिक कर दाखिल खारिज हो जाने के बाद यहां इंटीग्रेटेड सिटी बन रही हो मगर इसके कागज आज भी सेबी के पास गिरवी है।
मुजफ्फरनगर के आला अधिकारियों को इस पर खुद ही संज्ञान लेकर कार्रवाई करनी चाहिए मुकदमा दर्ज करना चाहिए


