नई दिल्ली। वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित बैठक में राज्यसभा के पूर्व सांसद ने मोहम्मद अदीब ने कहा कि , “ये मुसलमानों का एहसान है कि उन्होंने जिन्ना को मना किया, जिसके चलते पाकिस्तान का बॉर्डर लाहौर तक रह गया, नहीं तो ये लखनऊ तक होता। ”
यही नहीं उसने कहा कि आज हम अपने इलाके में एक गुनहगार की तरह बसर कर रहे हैं। अब तो देशद्रोही भी हो गए हैं, हमने ऐसे ऐसे लोगों को देखा, जो हमारे साथ थे और फिर अपनी सियासी जिंदगी बनाने के लिए हमको किस्मत के हवाले कर गए। जो लोग पाकिस्तान चले गए, उसका इल्जाम हमें दिया गया। मोहम्मद अदीब ने आगे कहा, “हम मानते हैं, जो पाकिस्तान गए वो महाजिर हो गए, लेकिन हमने तो अपना खून बांटा था, हमने तो जिन्ना को मना किया था और ठुकराया था। हमने लियाकत अली खान को नहीं माना था, हमने नेहरू गांधी और आजाद को माना था। हम सब मुसलमान जिन्ना के साथ नहीं गए, ये एहसान तो हमारा हुकूमत को मानना चाहिए। नहीं तो पाकिस्तान लाहौर तक नहीं लखनऊ तक बनता। ” उन्होंने आगे कहा कि हमने पाकिस्तान को मुक्तसर कर दिया और तुम हमें सजा देते हो, हम पर जुल्म करते हो। अब तक जितने भी हमारे ऊपर हमले हुए हैं, सबसे बड़ा हमला आपकी औकात का है। हम पर फसाद हुए, हमारे घरों पर बुलडोजर चले, हम इसलिए नहीं बोले कि मेरा घर तो महफूज है क्योंकि हम अपनी जिंदगी के लिए जीते हैं। मोहम्मद अदीब ने आगे कहा, “आज हमारे पास कुछ भी नहीं बचा। आप लोग हमारी कूवत है। हमने सबसे ज्यादा जो मुसीबत झेली है, वो ये है कि अब हमारी हैसियत नहीं रह गई। हम जब अलीगढ़ में पढ़ते थे, तो उस वक्त सियासी जमातें कहती थीं कि कहीं मियां नाराज न हो जाएं। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष खालिद सैफुल्लाह रहमानी और जनरल सेक्रेटरी फजलुर्रहीम मुजद्दिदी, कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, अमरैन महफूज रहमानी, समाजवादी पार्टी के नेता और रामपुर से सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी और कर्नाटक से राज्यसभा सांसद सैय्यद नसीर हुसैन भी वहां मौजूद थे।

