मुजफ्फरनगर । अर्चक पुरोहित संघ की बैठक 25 अक्टूबर को शिवा शिव मन्दिर केशवपुरी में हुई। इसमें यह मंथन किया कि देश के विद्वानों का निर्णय सही है। 31 अक्टूबर 2024 को (ग्ररूवार को प्रदोष काल में मध्य रात्री व्यापिनी का कार्तिक अमावस्या लक्ष्मी पूजन करना शास्त्र सम्मन्त रहेगा इस के अतिरिक्त श्रेष्ठकर नहीं है, क्योकि अमावस्या 31 को संध्या 15:52 से प्रारम्भ होकर 1 ता० का 18:16 तक है, विशेष वृष लगन सिंह लगन में पूजन का महत्व है। यंत्र पूजन तो रात्री सिंह लगन में ही विशेष होते है। जिसमें वृष लगन
वृष 18:26 से प्रा0 20:23 तक है।
सिंह ल० 00:55 से प्रा० 03:13 तक है।
नोट- उपरोक्त तथ्यों के अनुसार 01 नवम्बर को उक्त दोनो लग्न उपस्थित नही है। 31 अक्टूबर में क्यो न करें ।
1. दोनो लगन हमें 31 में ही अमावस्या में प्राप्त है।
2. दीपोत्सव निशा काल में ही होता है।
3. पोराणिक परम्परा में जिस दिन दिपाली होई एक ही दिन मानी जाती है।
4. अगले दिन तिथी में प्रतिपदा होने से रसस्वला दोष लगता है अतः निषेध है।
5. लक्ष्मी पूजन अमावस्या में श्रेष्ठ है विद्वानों में अनुसार 31 में होना चाहिए।
6. प्रतिपदा में पूजा से धन धान्य की हानि होती है। धर्म नगरी जिनमें घोषणा की गई है। वराणसी, उज्जैन, मथुरा वृन्दावन, प्रयागराज आदि धर्म नगरियों में घोषणा 31 अक्टूबर के लिए की गई है। अतः अर्द्धन पुरोहित संघ ने 31 अक्टूबर गुरूवार को ही दिपावली मनाने का निवेदन किया है:-
श्री बद्रीनाथ जी, श्री काशी जी, श्री अयोध्या नगरी, श्री चित्रकूट, श्री वृन्दावन, श्री खाटूश्याम, श्री कांची पीठ, चारो पीठ श्री रांगम, श्री कृष्ण मन्दिर उदूपी, श्री गंगनाथ मन्दिर मैसूर, श्री संगेरी मठ, श्री रामेश्वरम, श्री नाथद्वारा, श्री सोमनाथ गुजरात, श्री पीताम्बरा जी और श्री द्वरिका जी के विद्वान पुरोहितो की सूची:-
31 अक्टूबर की दीपावली मनाई जा रही है।
इस अवसर पर अर्चक पुरोहित संघ के अध्यक्ष पं० ब्रजबिहारी अत्री, पं० मोहन, पं० पिता जी, पं० अरविन्द पाण्डे, पं० शिवेश, पं० रोजश, पं० करूणा शंकर, पं० कमल नारायण, पं० वेदी शरण, पं० नन्दू, पं० सन्याषी, पं0 हरीश भारद्वाज, पं० रामानुज दूबे, पं० लक्ष्मण महाभाई, पं० धमेन्द्र, पं० केशवानन्द जी, पं० धनश्याम मिश्रा उपस्थित रहे।


