अहोई अष्टमी के दिन अगर महिलाएं व्रत रखने का विचार बना रही है तो सबसे इस व्रत से जुड़े नियमों और पूजा के विधान के अच्छे से जान लें। क्योंकि इस पूजा में छोटी सी गलती के कारण आपको जीवन में कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। अहोई अष्टमी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा अर्चना की जाती है। पूरे विधान से पूजा करने से भगवान शिव और माता पार्वती जल्दी ही प्रसन्न होकर लोगों को मनचाहा आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
अहोई अष्टमी के दिन क्या करें
अहोई अष्टमी के दिन सुबह उठकर स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
अहोई माता की मूर्ति या तस्वीर की पूजा कर सकती हैं।
पूजा में रोली, चंदन, फूल, दीपक, धूप आदि चढ़ाएं।
अहोई अष्टमी के दिन शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें।
अहोई अष्टमी की पूजा के समय व्रत कथा अवश्य सुनें।
अपने बच्चों को आशीर्वाद दें और अगर संभव हो तो ब्राह्मणों को दान करें।
अहोई अष्टमी के दिन क्या न करें
सूई और धागा न चलाएं: इस दिन सूई और धागा चलाना वर्जित माना जाता है,।
कैंची या चाकू का उपयोग न करें: इस दिन कैंची या चाकू का उपयोग नहीं करना चाहिए।
दूसरों को कुछ न दें: इस दिन दूसरों को कुछ भी नहीं देना चाहिए।
किसी से झगड़ा न करें: इस दिन किसी से झगड़ा नहीं करना चाहिए।
कड़वा भोजन न करें: इस दिन कड़वा भोजन नहीं करना चाहिए।
पूजा का सही विधान
अहोई अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर माता अहोई की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
मूर्ति को गंगाजल से स्नान कराएं और नए वस्त्र पहनाएं।
मूर्ति के सामने दीपक जलाएं और धूप बत्ती दिखाएं।
रोली, चंदन, फूल आदि चढ़ाएं।
अहोई अष्टमी की कथा सुनें और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य दें।
कथा सुनते समय इन बातों का रखें ध्यान
अहोई अष्टमी के दिन पूजा के समय व्रत कथा सुनते समय आप अपनी गोद में सात प्रकार के अनाज अवश्य रखें और कथा खत्म होने के बाद इन अनाजों को गाय को खिला दें। इससे संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से संतान की रक्षा होती है और वे स्वस्थ रहते हैं। इसके अलावा जीवन में आने वाली परेशानियों से राहत मिलती है।

