कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को प्रतिवर्ष करवा चौथ का व्रत रखा जाता है। इस दिन विवाहिताएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती है। रात में चाद की पूजा करने के बाद ही पानी पीकर व्रत को खोलती है। ये परंपरा सदियों से चली आ रही है।
हिंदू पंचांग के अनुसार 19 अक्टूबर से कार्तिक माह की चतुर्थी तिथि का आरंभ हो रहा है। जो 19 को शाम 6:17 मिनट पर शुरू होकर 20 अक्टूबर को दोपहर 3:47 तक रहेगी। जिसके चलते इस साल करवा चौथ का व्रत रविवार यानी 20 अक्टूबर को रखा जाएगा। ऐसे में अगर आपका इस साल पहला करवाचौथ है तो कुछ चीजों का ध्यान रखना जरूर रखे।
सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ का व्रत विशेष महत्व रखता है। शादी के बाद पहले करवाचौथ की पूजा के बारे में सभी जानकारी ना होना आम है। ऐसे में अगर आपका भी ये पहला करवाचौथ है तो इन बातों का ध्यान जरूर रखे। ताकी आपके लिए ये पर्व आसान हो जाए।
करवा चौथ की मान्यताएं
आजकल की युवा पीढ़ी को रीति रिवाजों की अधिक जानकारी नहीं होती है। ऐसे में करवा चौथ का व्रत रखने से पहले उसकी मान्यताओं को जानना बहुत जरूरी है। इसलिए अपनी सास से इस व्रत की मान्यता के बारे में जरूर पूछे। साथ ही इस दिन व्रत की कथा सुने। और पूजा की सही विधि भी जाने।
मेहंदी और श्रृंगार करना ना भूलें
इस दिन व्रत के साथ शादीशुदा महिलाएं सोलह श्रृंगार करती है। सोलह श्रृंगार का इस व्रत में काफी महत्व है। इस दिन महिलाएं मेहंदी लगवाकर पूरा श्रृंगार करती है। ऐसे में अगर आप पहली बार शादी के बाद करवा चौथ का व्रत मना रही है तो आलता, गहनें, बिंदी, सिंदूर आदि श्रृंगार का सामान की पहले से ही तैयारी कर लें। इस दिन लाल जोड़ा काफी शुभ माना जाता है।
सरगी भी जरूरी
देश में करवा चौथ में कई जगहों पर सरगी खाने की परंपरा है। इस दिन बहू को सास सरगी देती है। इसे खाकर ही बहू व्रत को शुरू करती है। इसे सुबह सूर्योदय से पहले खाना होता है। जिसके बाद से निर्जला व्रत शुरू होता है।
सरगी में फल, कपड़े, सिंगार के समान आदि चीजें होती हैं। इस दिन सुबह उठकर स्नान कर साफ कपड़े पहनें। साथ ही बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर सरगी ग्रहण करें और अपना निर्जला व्रत शुरू करें।
व्रत कैसे खोले?
पहला करवाचौथ रखने वालों के लिए बता दें कि व्रत चांद देखने के बाद ही खोला जाता है। चांद की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा के बाद पति के हाथों से पहले पानी पीए। उसके बाद प्रसाद गृहण करें और फिर भोजन खाएं।

