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शारदीय नवरात्र 3 अक्टूबर से, जानिए किस समय करें घट स्थापना

*आश्विन नवरात्र घटस्थापना बृहस्पतिवार, अक्टूबर 3 2024 को*

*घटस्थापना मुहूर्त – प्रातः 06:15 से प्रातः 07:22*

*अवधि – 01 घण्टा 06 मिनट्स*

*घटस्थापना अभिजित मुहूर्त – प्रातः 11:46 से प्रातः 12:33*

*अवधि – 00 घण्टे 47 मिनट्स*

मुजफ्फरनगर । विष्णुलोक के संचालक रत्न रुद्राक्ष विशेषज्ञ पंडित विनय शर्मा ने बताया कि इस वर्ष “शारदीय नवरात्र” 3 अक्टूबर 2024 से प्रारम्भ होकर 12 अक्टूबर 2024 तक रहेगें। घटस्थापना नवरात्रि के समय किये जाने वाला महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में से एक है। यह नौ दिवसीय उत्सव के आरम्भ का प्रतीक है। घटस्थापना देवी शक्ति का आह्वान है तथा हमारे शास्त्र सचेत करते हैं कि, अनुचित समय पर घटस्थापना करने से देवी शक्ति का प्रकोप हो सकता है। अमावस्या तथा रात्रिकाल में घटस्थापना करना वर्जित होता है। प्रतिपदा तिथि के दिन का पहला एक तिहायी भाग घटस्थापना हेतु सर्वाधिक शुभ समय माना जाता है। यदि किसी कारणवश यह समय उपलब्ध न हो, तो अभिजीत मुहूर्त में भी घटस्थापना की जा सकती है। घटस्थापना के लिए आवश्यक सामग्री:- चौड़े मुँह वाला मिट्टी का एक बर्तन, पवित्र स्थान की मिट्टी, सप्तधान्य (7 प्रकार के अनाज), कलश, जल (संभव हो तो गंगाजल), कलावा/मौली, सुपारी, आम या अशोक के पत्ते (पल्लव), अक्षत (कच्चा साबुत चावल), छिलके/जटा वाला नारियल, लाल कपड़ा। घट स्थापना करते समय *“ॐ अपां पतये वरुणाय नमः”* मंत्र के साथ कलश पूजन होता है। घटस्थापना विधि :- पहले मिट्टी को चौड़े मुँह वाले बर्तन में रखें और उसमें सप्तधान्य बोएँ। अब उसके ऊपर कलश में जल भरें और उसके ऊपरी भाग (गर्दन) में कलावा बाँधें। आम या अशोक के पल्लव को कलश के ऊपर रखें। अब नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर और पल्लव के बीच में रखें। नारियल में कलावा भी लपेटा होना चाहिए। कलश पर स्थापित नारियल की शिखा पूजा करने वाले साधक की तरफ़ रखना चाहिए। जिस ओर नारियल पेड़ की टहनी से जुड़ा होता है, वह मुख जातक की ओर होना चाहिए। कभी भी नारियल का मुख नीचे की ओर नहीं होना चाहिए। घटस्थापना पूर्ण होने के बाद देवी का आह्वान करते हैं। एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर माँ भगवती का विग्रह स्थापित करके उसकी नौ दिन तक नित्य पूजा की जाती है। साधक को नौ दिनों तक दूध, दही, घी, शर्करा, शहद, फल आदि से माँ भगवती का अभिषेक करना चाहिए। माँ दुर्गा के साधक को नित्य दुर्गा सप्तशती का पाठ, दुर्गा चालीसा और दुर्गा जी का नवार्ण मंत्र *“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे”* इस मंत्र की स्फटिक माला से एक माला प्रतिदिन करनी चाहिए। नवरात्रि के दिनों में माँ दुर्गा नौ दिन के लिए पृथ्वी पर विचरण करती है। इन नौ दिनो में जो व्यक्ति माँ भगवती का अपने घर में आह्वान करके उनकी पूजा अर्चना करता है, उसके परिवार में सुख ऐश्वर्य का अपार भण्डार रहता हैं।

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Author: Taja Report

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