तुलसा सनातन संस्कृति का अभिन्न अंग है। इसी तरह अपराजिता को तुलसी के समान बहुत पवित्र माना जाता है। इस पौधे की बेल का लाभ लेने के लिए इसे घर की पूर्व, उत्तर, उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना चाहिए। इस बेल का संबंध माता लक्ष्मी से माना गया है। घर में इस पौधे के होने से मां लक्ष्मी स्वयं घर में विराजमान रहती है और नौकरी व व्यापार में काफी अच्छी तरक्की होती है। यह पौधा भगवान विष्णु और महादेव को भी बेहद प्रिय है। इस पौधे से धन धान्य की कमी दूर होती है और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
वास्तु के अनुसार घर के बगीचे या बालकनी में उत्तर-पूर्व एवं पूर्व दिशा में छोटे पौधे जैसे तुलसी, गेंदा, लिली, केला, आंवला, हरीदूब, पुदीना, हल्दी आदि लगाने चाहिए। इन दिशाओं में छोटे पौधे होने से उगते हुए सूर्य की स्वास्थ्यवर्धक रश्मियां घर में प्रवेश कर सकेंगी, जिससे परिवार के सदस्यों की सेहत दुरुस्त रहेगी, सामाजिक रिश्ते मजबूत होंगे।
उत्तर दिशा में नीले रंग के फूल देने वाले पौधे जीवन में समृद्धि लाने में सहायक सिद्ध होंगे। नीला रंग व्यक्ति के जीवन में स्थिरता व पवित्रता लाता है। नीले रंग के गमले में मनीप्लांट लगाने से करियर में तरक्की मिलती है।
ऊंचे पेड़ों को सदैव घर की दक्षिण या पश्चिम दिशा में लगाना उचित माना गया है। पीपल को घर से पर्याप्त दूरी पर या कहीं खुले स्थान में पश्चिम दिशा की तरफ लगाना शुभ परिणाम देता है। सफ़ेद रंग के फूलों के पौधे जैसे चांदनी, मोगरा, चमेली आदि को इस दिशा में लगाने से लाभ एवं प्राप्तियों के अवसर बढ़ जाते हैं। इनसे बच्चों में रचनात्मक शक्ति का विकास होता है।
दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) दिशा में लगाने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होगी। लाल रंग के फूल जीवन में ऊर्जा और उमंग भरते हैं, दक्षिण-पूर्व या दक्षिण दिशा में लगे हुए लाल फूल हमें प्रसिद्धि व यश प्रदान करते हैं। दीवार पर चढ़ने वाली बेलें भी इसी दिशा में लगाना शुभ माना गया है।

