मुजफ्फरनगर । 31 जुलाई 2009 को खाद्य निरीक्षक वी .के.राठी को मुखबिर द्वारा सूचना मिली कि गांव काकड़ा में कुछ लोगों द्वारा नकली सिंथेटिक मावे का निर्माण किया जा रहा है जिसकी सप्लाई जनपद के विभिन्न हिस्सों में की जाती है उक्त सूचना से स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी मुजफ्फरनगर को अवगत कराया गया और उप जिलाधिकारी बुढ़ाना से दूरभाष पर वार्ता की गई और तत्पश्चात मिले दिशा निर्देशों के अनुसार वादी मुकदमा खाद्य निरीक्षक वी.के.राठी उनके सहयोगी खाद्य निरीक्षक डी.के. वर्मा थाना शाहपुर पर रात्रि 8:00 बजे पहुंचे थाना शाहपुर पर उप जिलाधिकारी महोदय, और थाना अध्यक्ष श्री केपी शर्मा, व एसआई जय नाथ यादव,कांस्टेबल देवेंद्र सिंह, कांस्टेबल समर याव, कांस्टेबल शमीम अहमद, उपस्थित मिले तथा समस्त संयुक्त टीम के साथ वी.के. राठी खाद्य निरीक्षक गांव काकड़ा पहुंचे और गांव काकड़ा में अभियुक्त रहीसु पुत्र रसीद के घर सिंथेटिक नकली मावे का निर्माण किया जा रहा था इस सूचना से सभी को अवगत कराया जो टीम में शामिल थे और एक दूसरे की जामा तलाशी ली गई किसी के पास कोई जुर्म से संबंधित प्रतिबंधित वस्तु तो नहीं है तथा जनता के लोगों को भी मकसद बताकर उन्हें अपने साथ चलने के लिए कहा गया तो लोगो के द्वारा भलाई बुराई व डर के कारण जनता के लोगों ने मना कर दिया रात के 8:50 बजे अभियुक्त रहीसु के गांव काकड़ा स्थित घर पर छापामार कार्यवाही आरंभ की गई मौके पर मावा निर्माण कार्य चल रहा था जिसमें तीन व्यक्ति संलिप्त थे जिनमें से रहीसु पुत्र रसीद, हाशिम पुत्र रसीद, दोनों भाई एवं तोला पुत्र अजब्दीन नौकर थे यह तीनों लोग सफेद पाउडर में एक टीन में उपस्थित सफेद मटमैला पदार्थ निकालकर मिला रहे थे तथा मौके पर दो अलग-अलग परांतो में मावा उपस्थित था तथा एक परांत में ये पाउडर तथा सफेद मटमैला पदार्थ मिला लगभग 20 किलोग्राम तैयार पदार्थ था जिसे यह तीनों लोग मिला रहे थे मौके पर भट्टी चालू हालत में थी तथा मावे वाली परांतो में से एक परांत में मावा पेडी के रूप में था तथा दूसरी में मावा इकट्ठा थेपी के रूप में था जो गाढ़ा पीलापन लिए हुए था तीनों मुलजिमों से पूछने पर इन तीनों मुलजिमों के द्वारा बताया गया कि यह लोग बिना दूध के सस्ता सफेद पाउडर जो मौके पर उपस्थित था में वनस्पति आदि मिलाकर मावा तैयार करते हैं तथा उसे विभिन्न बाजारों में सप्लाई कर देते हैं मौके पर दोनों प्रकार के मावे पेडी एवं मावे थेपी, सफेद पाउडर, सफेद मटमैला पदार्थ, इन सबको मिलकर जो पदार्थ तैयार किया जा रहा था मावे के रूप में इसका एक-एक नमूना लिया गया इसी दौरान गांव में नकली मावा पकड़े जाने की सूचना मिलते ही लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई थी तथा नारेबाजी करते हुए अक्रोशित होने लगी थी तथा अभियुक्त गण के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की मांग करने लगी थी मौके पर उपस्थित पुलिस बल एवं उप जिलाधिकारी महोदय ने बमुश्किल भीड़ को कठोर कार्यवाही के आश्वासन के साथ शांत किया था लोग जन्माष्टमी के पर्व पर मावे का इस्तेमाल न करने की कसम खाने लगे नकली सिंथेटिक मावे के निर्माण के चलते तीनों अभियुक्त को मय निर्माण सामग्री और जो मावा पेडी के रूप में बना हुआ था जो लगभग 40 से 50 किलोग्राम था और जो मावा थेपी के रूप में था लगभग 30 से 35 किलोग्राम उसे मौके पर कब्जे में लेते हुए उससे संबंधित कागजात मौके पर तैयार करते हुए पुलिस बल के सुपुर्द उपरोक्त नकली मावे को और मुलजिमान को कर दिया था तथा 31.7.2009 को थाना शाहपुर पर अभियुक्त गण के विरुद्ध एफआईआर रात्रि 10:45 पर पंजीकृत हुई थी जो खाद्य निरीक्षक वी.के.राठी द्वारा पंजीकृत कराई गई थी अभियोजन द्वारा न्यायालय में केस को साबित कराए जाने के लिए कुल चार गवाह परीक्षित कराए गए जिनमें वादी मुकदमा वी.के.राठी देवेंद्र कुमार वर्मा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, तत्कालीन थाना अध्यक्ष केपी शर्मा, व हेड कांस्टेबल अमरजीत सिंह,को परीक्षित कराया गया अभियोजन की ओर से माननीय न्यायालय में पैरवी मजबूती के साथ की गई तथा श्री आशीष त्यागी एडीजीसी क्रिमिनल व श्री अरुण कुमार शर्मा एडीजीसी क्रिमिनल के द्वारा अभियोजन साक्ष्य को माननीय न्यायालय में साबित कराया गया माननीय न्यायालय द्वारा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर तथा दोनों पक्षों के द्वारा बहस के दौरान जो दलीलें दी गई उनके आधार पर अभियोजन साक्ष्य को सिद्ध मानते हुए उपरोक्त अभियुक्त गण को नकली मावा बनाने से संबंधित अपराध में धारा 272 भारतीय दंड संहिता में सात- सात वर्ष के कारावास से और पांच- पांच हजार रुपए के आर्थिक दंड से दंडित किया है।


