लखनऊ । भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक लोकभवन में मनोज कुमार सिंह मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई। बैठक में श्री देवेश चतुर्वेदी अपर मुख्य सचिव कृषि,उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन आशीष गोयल, वीणा कुमारी प्रमुख सचिव गन्ना एवं चीनी उद्योग, श्री गुरु प्रसाद प्रमुख सचिव राजस्व,योगेश कुमार प्रमुख सचिव पशुपालन, मनीषा सदस्य राजस्व परिषद, बीएल मीना प्रमुख सचिव उधान,जितेंद्र तोमर कृषि निदेशक, जेएस नवीन चकबंदी आयुक्त उत्तर प्रदेश, अनुराग यादव सचिव कृषि,अंजनी कुमार मंडी निदेशक सहित लगभग 25 विभाग शामिल रहे ।
बैठक में 23 सूत्रीय मांगों पर लगभग दो घंटे लोकभवन में मुख्य सचिव कार्यालय के सभागार में चर्चा हुई।
बैठक में निजी नलकूप की बिजली को पंजीकरण एवं शर्तो से मुक्त करने, आलू निकासी का आदेश बदलने, अंश निर्धारण की त्रुटि को ग्राम स्तर पर ठीक करने, बाढ़ में उपजाऊ भूमि को ठीक करने में सहायता राशि,फसलों का मुववजा दिए जाने ,गन्ना भुगतान हेतु शामली का भुगतान त्रिवेणी द्वारा किए जाने, भुगतान न करने वाली सिंभावली समूह ,मोदी समूह सहित सभी चीनी मिलो पर सख्ती किए जाने, मोरना, नजीबाबाद का विस्तारीकरण किए जाने,चकबंदी अधिनियम में।बदलाव किए जाने के , बिजनौर में गुलदार से होने वाली घटनाओं को रोकने हेतु वन विभाग बिजनौर की योजना की स्वीकृति दिए जाने के आदेश संबंधित विभाग के अधिकारी को दिए। बैठक में मुख्य।सचिव महोदय द्वारा सभी विषयों पर विचार कर समाधान का आश्वासन दिया गया।
बैठक में 1. राजेन्द्र सिंह राष्ट्रीय संरक्षक भाकियू (अ)
2. राजेष सिंह चौहान राष्ट्रीय अध्यक्ष भाकियू (अ)
3. राकेष त्यागी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भाकियू (अ)
4. धर्मेन्द्र कुमार राष्ट्रीय प्रवक्ता भाकियू (अ)
5. हरिनाम सिंह प्रदेश अध्यक्ष भाकियू (अ)
6. दिगम्बर सिंह युवा प्रदेश अध्यक्ष भाकियू (अ)
7. राजवीर सिंह प्रदेष उपाध्यक्ष भाकियू (अ)
8. राम स्वरूप वर्मा पूर्वाचल प्रभारी/संगठन मंत्री भाकियू (अ)
9. अनार सिंह मण्डल अध्यक्ष लखनऊ भाकियू (अ)
10. राज कुमार मण्डल अध्यक्ष आगरा भाकियू (अ)
11. महेन्द्र मुखिया जिला अध्यक्ष गौतमबुद्धनगर भाकियू (अ)
12. दिनेष कुमार जिला अध्यक्ष जालौन भाकियू (अ)
13. कुलवंत सिंह जिला अध्यक्ष खीरी भाकियू (अ) शामिल रहे।
बैठक।में निम्न विषय पर चर्चा हुई है
आदरसहित
धर्मेन्द्र मलिक
राष्ट्रीय प्रवक्ता
सेवा में,
श्रीमान मुख्य सचिव महोदय
उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ
विषयः- उत्तर प्रदेश किसानों की समस्याओं के समाधान के सम्बन्ध में।
उत्तर प्रदेश कृषि आधारित राज्य है को यहां पर 60 प्रतिशत लोग प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से कृषि कार्य में लगे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसान हित के लिये अनेक कार्य किये गये हैं लेकिन अभी भी कुछ विषयों पर ठोस कदम उठाये जाने की आवश्यकता है आज दिनांक 31/07/2023 को लोकभवन लखनऊ में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के प्रतिनिधिमण्डल के साथ आपकी वार्ता के माध्यम से किसान हित में निम्न सुझाव दे रहे हैं जिन्हें किसान हित में लागू किया जाना आवष्यक है,
1. उत्तर प्रदेष के गन्ना किसानों का लगभग 3 हजार करोड रूपया बकाया है। प्रदेश की कुछ चीनी मिलों द्वारा किसानो का गन्ना भुगतान कई वर्षों से समय पर नहीं किया जा रहा है उत्तर प्रदेश के बकाया गन्ना मूल्य का अविलम्ब भुगतान कराया जाये। 14 दिन के अन्दर भुगतान न होने पर विलम्बित भुगतान पर गन्ना मूल्य एवं कमीषन भुगतान हेतु उ.प्र. गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम 1953 एवं तत्संबंधी नियमावली 1954 में व्यवस्था के अनुसार विलम्बित भुगतान पर ब्याज दिलाया जाये जिसका वायदा चुनावी घोषणा-पत्र में किया गया था। बजाज समूह पर भुगतान हेतु सख्ती की जाए।
2. प्रदेश में लंबे समय तक आलू का भाव न मिलने के कारण सड़को पर फेकना पड़ता था। इस बार आलू का भाव उचित मिल रहा है लेकिन किसी सरकारी आदेश के कारण शीतगृह मालिक आलू किसानो पर निकासी का दबाव बना रहे है जिससे आलू की कीमत गिर रही है। इस तरह के आदेश को वापिस किया जाए।
3. प्रदेश में आलू भंडारण हेतु शीतगृह मालिकों द्वारा अलग अलग किराया लिया जा रहा है। पूर्व की भांति आलू भंडारण का किराया सरकार द्वारा तय कर सभी जनपदों में लागू कराया जाए। बाराबंकी, लखनऊ, आगरा सहित कई जनपदों में निकासी के समय वजन 5 किलो से बढ़ाकर 20 किलो तक काटा जा रहा है ऐसा करने वालों पर कार्यवाही की जाए। उदाहरण के तौर पर सनातन, सीसीएस शीतगृह लखनऊ द्वारा किसानो के साथ वजन को लेकर मारपीट तक की घटना सामने आई है और इनके द्वारा पूर्व केे वर्षों में किसानों का बिके आलू का पैसा भी बकाया है इनके विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही की जाये।
4. किसानों के आलू, प्याज, टमाटर जैसे उत्पादों को बाजारों तक पहुँचाने के लिये मदर डेयरी, हरित डेयरी व पराग जैसी संस्थाओं के साथ मिलकर सप्लाई चेन बनायी जाये और मदर डेयरी की तरह सप्लाई चेन को मैनेज करने के लिए प्रोफेशनल्स को हायर किये जाये। इस क्षेत्र में प्रोसेसिंग और डिस्ट्रीब्यूशन में डायरेक्ट-इनडायरेक्ट रूप से युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।
5. प्रदेश के कई जनपदों में बाढ़ के कारण किसानो की धान की नर्सरी खराब हो गई है इस समय फसल का लगाना भी संभव नहीं है। किसानो को जीवनयापन हेतु 25 प्रतिषत सहायता राशि एवं कर्ज में ब्याज पर छूट दी जाए। भविष्य की फसल बुआई हेतु किसानों को बीज की उपलब्धता विभाग द्वारा निःषुल्क कराई जाये।
6. बाढ़ प्रभावित जनपदों में पशुओं में टीकाकरण अभियान, मानव चिकित्सा हेतु ग्राम स्तर पर कैंप का आयोजन किया जाए।
7. निजी नलकूप पर निःशुल्क बिजली योजना को शर्तों में बांध दिया गया है जिससे किसानों में आक्रोष है किसानों के विद्युत संयोजन का एग्रीमेंट हॉर्स पावर के आधार पर है लेकिन निःषुल्क बिजली योजना में 240 यूनिट की घोषणा की गई है यह किसानों के साथ छलावा है इसमंे यह तय किया जाये की कितने हॉर्सपावर तक बिजली मुफ्त दी जायेगी। किसानो को सामान्य योजना में स्वीकृत विद्युत संयोजन का सामान दिलाया जाये।
ग्रामीण क्षेत्र में सरकार के आदेषानुसार 16 से 18 घण्टे विद्युत आपूर्ति की जा रही है लेकिन उसका समय ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों से मैच नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल के समय प्रातः 8 बजे से सायं 2 बजे तक विद्युत आपूर्ति की जाये।
8. उत्तर प्रदेष के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के किसानों की मांग है कि एनजीटी के 10 वर्ष पुराने डीजल वाहनों को एनसीआर में चलाने पर रोक के आदेष से कृषि कार्य में प्रयोग होने वाले ट्रैक्टर डीजल इंजन को चलाने की छूट दी जाये क्यूंकि किसानों के ट्रैक्टर का 1 वर्ष में 200 घण्टे चलने का भी औसत नहीं आता है 10 वर्ष में किसानों के ट्रैक्टर खराब नहीं होते हैं। उत्तर प्रदेष सरकार मे ंभी 10 वर्ष से ऊपर के वाहन प्रयोग में लाये जा रहे हैं। इसके लिए हरियाणा की तर्ज पर ट्रैक्टरों, ड़ीज़ल इंजन को छूट दिये जाने हेतु उत्तर प्रदेष विधि (विषेष उपबन्ध) विधेयक 2024 लाया जाये।
9. रियल टाइम खतौनी बनाते समय अंश निर्धारण, नाम आदि में हुई लिपिकीय त्रुटि को ग्राम स्तर पर कैंप लगाकर दुरस्त किया जाय। किसान के सभी खसरों का एक खाता बनाया जाए।
10. तहसीलों में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त किया जाये। 5 वर्षों से अधिक जमे लेखपालों को स्थानान्तरित किया जाये। विरासत, दाखिल खारिज, प्रमाण-पत्र आदि कार्य तय समय सीमा में न करने वालों के विरूद्ध कार्यवाही की जाये।
11. अन्ना प्रथा पर रोक लगाते हुये सरकार द्वारा वृहद्ध कार्य योजना बनाकर जंगली जानवरों एवं आवारा पशुओं से किसानों को निजात दिलायी जाये। गौषाला निर्माण हेतु मेरी पंचायत मेरी गौषाला अभियान चालाया जाये। पंचायत स्थल पर परिवार रजिस्टर की तर्ज पर पशु रजिस्टर भी बनाया जाये।
12. माननीय मुख्यमंत्री जी की घोषणा के अनुपालन में किसान सहकारी शुगर मिल नजीबाबाद बिजनौर, द गंगा कॉपरेटिव शुगर मिल मोरना, मुजफ्फरनगर की क्षमता वृद्धि का कार्य अविलंब शुरू किया जाए। जनपद फतेहपुर में चीनी मिल की स्थापना कराई जाए।
13. प्रदेश में किसान चकबंदी से पीड़ित है। पिछले दस वर्षों या उससे ऊपर लंबित चकबंदी वाले गांव की सूची तैयार कर आगामी 6 माह में शून्य किये जायें। जनपद में 10 वर्ष से अधिक गांव शून्य होने पर ही नये गांव चकबंदी प्रक्रिया में शामिल किये जायें। चकबंदी अधिनियम में बदलाव करते हुये नये प्रावधान किये जायें।
14. उत्तर प्रदेष के किसानों के समक्ष छोटी जोत, गरीबी और ऋण, जलवायु परिवर्तन के कारण अप्रत्याषित मौसम, बाजार और भण्डारण तक सीमित पहुंच, अधिक उत्पादन लागत, सिंचाई के सीमित संसाधन, विखण्डित भूमि, कृषि षिक्षा और विस्तार का अभाव, कीट प्रबंधन पर महंगा खर्च, छोटे किसानों की सहकारी ऋण तक सीमित पहुंच, आदि चुनौतियों के कारण किसान कृषि से विमुख हो रहे हैं। प्रत्येक वर्ष लगभग 4 प्रतिषत छोटे और मझोले किसान खेती छोड़ रहे हैं जिससे प्रदेष में शहरीकरण का दबाव बढ़ता जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा कृषि विस्तार का कोई कार्य नहीं किया जा रहा है। कृषि विस्तार के कार्यों में तेजी लाई जाये। प्रदेश भर में नकली खाद, बीज, दवाई के खिलाफ अभियान चलाया जाये। सभी जनपदों में खाद, बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की जाये।
15. उत्तर प्रदेष के पशुपालक किसान के सामने खराब बुनियादी ढांचा जानवरों के आवास, भोजन, देखभाल जैसी अपर्याप्त सुविधाएं, बाजार तक सीमित पहुंच, दूध, अण्डे जैसे उत्पाद बेचने में कठिनाई, उच्च लागत, अपर्याप्त प्रबंधन, उच्च गुणवत्ता वाले प्रजनन स्टॉक और नस्ल सुधार कार्यक्रम सीमित पहुंच, चारे की कमी, ऋण और बीमा जैसी सुविधाओं की सीमित पहुंच, प्रषिक्षण व विस्तार सेवाओं की कमी आदि समस्याओं के कारण प्रदेष मे पषुपालक किसानों के सामने जीवन यापन का संकट है जिसके कारण पशुपालन समाप्त हो जा रहा है। इन चुनौतियों से निपटने के लिये सरकारी समर्थन, निजी निवेष और किसान सषक्तिकरण को शामिल करते हुए एक वृहद योजना बनाई जाये।
16. जनपद गौतमबुद्धनगर में किसानो की आबादी का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। तीनों प्राधिकरण से किसानों का 64 प्रतिषत अतिरिक्त मुआवजा अविलंब दिलाया जाए।
17. प्रदेश में प्रधानमंत्री सम्मान निधि की तरह कृषि निवेश का समर्थन करने के लिये किसानों को प्रति सीजन (खरीफ व रबी सीजन) राज्य सरकार को 3000 रुपए प्रति एकड़ की वित्तीय सहायता प्रदान करनी चाहिए। इसके प्रदेश कृषि के डिजिटलीकरण को भी बढ़ावा दिया जाये।
18. प्रदेष में कृषि मण्डी उत्पादन समितियां केवल खरीद तक सीमित हो गई है इनकी प्रासंगिकता बनाये रखने हेतु पैकेजिंग, ग्रेडिंग, ब्रांडिंग का कार्य मण्डी समिति द्वारा किया जाये। मण्डियों में किसानों की फसलों वैल्यू एडिषन हेतु धानमिल/दालमिल/पालेसर/आटामिल आदि संयंत्रों की स्थापना की जाये जिससे किसान अपने खर्च पर धान का चावल, दाल, बेसन, तेल बनवाकर मण्डी की ब्रांड पर बेच सके। मण्डी समितियों में किसानों के लिये भण्डारण की व्यवस्था की जाये।
19. जनपद गौतमबुद्धनगर में करोडों रूपये की लागत से बनी भव्य फूलमण्डी को फिर से चालू कराया जाये।
20. पूरे उत्तर प्रदेष में जल जीवन मिषन के अन्तर्गत टंकियों की लाईन अनुबन्ध के विपरीत मषीनों के द्वारा सड़के तोडकर डाली गईं हैं पिछले 6 माह से अधिक समय से गांव की सड़कें टूटी पडी हैं जिसपर आए दिन मोटरसाईकिल, बुग्गी, टैक्टर आदि उनके द्वारा तोड़ी गई सड़कों के गड्ढों में गिरने से दुर्घटना व वाहनों की क्षति हो रही है जबकि अनुबन्ध में यह लाइनें एचडीडी मषीनों द्वारा डाली जानी थीं। पैसे बचाने के लिये जानबूझकर यह कार्य मैनुअल कराया गया है। अधिकारियों को कमीषन देकर इनके द्वारा अनापत्ती प्रमाण-पत्र भी हासिल कर लिये गये। इनकी जॉंच कराकर इनके विरूद्ध ब्लैकलिस्ट किये जाने एवं ग्रामीण सड़कों को पूर्व की भंाति बनाये जाने के आदेष संबंधित विभाग को निर्गत किये जायें। इसके अन्तर्गत बिजनौर, मुजफ्फरनगर, बाराबंकी, अमरोहा, संभल में स्थिति कराये गये कार्यों की बहुत दयनीय है। उपरोक्त जनपदों में कंपनियों द्वारा दूसरे पेटी डीलर से कार्य कराया जाता है जिसके रेट कम होने के कारण कार्य गुणवत्तापूर्वक नहीं हो पा रहा है जिसके कारण प्रदेष में एक दो जगह टंकी गिरने की सूचना भी प्रकाष में आई है।
21. लखनऊ विकास प्राधिकरण, नगर निगम द्वारा अवैध निर्माण, अनियमित कालोनी आदि के समय कोई कार्यवाही नहीं की जाती है अगर कोई जागरूक नागरिक या संगठन इसकी षिकायत करता है तो संबंधित व्यक्तियों से धन वसूली कर उसमें कोई कार्यवाही नहीं की जाती इसके बाद अगर शासन से कोई आदेष निर्गत किये जाते हैं तो ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की जाती है। इसे रोकने हेतु उस समय तैनात अवैध निर्माण कराने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की जाये।
22. विभिन्न जनपदों में सहकारी समिति एवं को-आपरेटिव बैंक द्वारा मिलकर किसानों के साथ वित्तीय धोखाधड़ी की जा रही है। जॉंच में दोषी पाये जाने के बावजूद भी छोटी-मोटी विभागीय कार्यवाही के नाम पर इति श्री कर ली जाती है। कुछ समय बाद फिर से सभी लोग नौकरी पा जाते हैं लेकिन यह पैसा किसानों के नाम चलता रहता है इस तरह की समितियों में किसानों को खाद् एवं ऋण की सुविधा नहीं मिल पा रही है। वित्तीय अनियमितता में दोषी पाये जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी जाये।
23. वन्य क्षेत्रों से लगते जनपद बिजनौर, लखीमपुरी खीरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर में वन्य जीवों के हमलों में लगातार जनहानि, पशुहानि हो रही है जिससे किसानों का कृषि कार्य करना भी दूभर हो गया है। एक वृहद कार्य योजना बनाकर इसे रोकने हेतु आवष्यक कदम उठाये जायें।

