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{गंगा दशहरा -कल,महत्व एवं पूजा -दान विधि}*
*पंचांग के अनुसार इस वर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 16 जून को रात्रि 2 बजकर 32 मिनट से शुरू होकर 17 जून को ब्रह्म बेला 4 बजकर 43 मिनट तक रहेगी. गंगा दशहरा 16 जून को मनाया जाएगा. गंगा दशहरा के दिन सुबह 11 बजकर 13 मिनट तक हस्त नक्षत्र रहेगा. यह समय गंगा नदी में स्नान के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. इस दिन सुबह 4 बजकर 3 मिनट से 4 बलकर 45 मनिट तक ब्रह्म मुहूर्त है. इसके साथ ही इस दिन रवि योग, सर्वार्थ सिद्ध योग और अमृत योग भी बन रहा है*
*इन योगों में पूजा पाठ और दान बहुत शुभ माना जाता है*
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*(गंगा दशहरा की पूजा विधि*)
*गंगा दशहरा के दिन अगर संभव हो तो जरूर गंगा स्नान करना चाहिए. अगर संभव नहीं हो तो पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान करें. स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें और माता गंगा और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करें. इस दिन गंगा स्रोत का पाठ करना शुभ फल देने वाला होता है*
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*1-गंगा दशहरा के दिन काशी के दशाश्वमेध घाट में दस बार स्नान करके शिवलिंग का दस संख्या के गंध, पुष्प, दीप, नैवेद्य और फल आदि से पूजन करके रात्रि को जागरण करने से अनंत फल प्राप्त होता है।*
*2 -इस दिन गंगा पूजन का भी विशिष्ट महत्त्व है। इस दिन विधि-विधान से गंगाजी का पूजन कर 10 सेर तिल, 10 सेर जौ और 10 सेर गेहूं 10 ब्राह्मणों को दान करना चाहिए।*
*3-गंगा दशहरे के दिन मौसम का प्रमुख फल आम खाने और आम दान करने का भी विशेष महत्व है।*
*4-स्कंद पुराण के अनुसार इस दिन स्नान, दान और पूजन का विशेष महत्व होता है। गर्मी का मौसम होने के कारण श्रद्धालु इस दिन छतरी, वस्त्र, जूते-चप्पल दान करते हैं।*
*5 -जप-तप व्रत पूजन के अलावा अनेक परिवारों में घर के दरवाजे पर पांच पत्थर रखकर पांच पीर पूजे जाते हैं, और चूरमा बनाकर साधु संत ,फकीर और ब्राह्मण को बांटा जाता है*

