हरिद्वार । किसानो की समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक जुलाई में लखनऊ विधानसभा अक्टूबर 2024 में देहरादून विधानसभा का किसानों की समस्या को लेकर होगा घेराव करेगी।
भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय अधिवेशन के तीसरे दिन चौधरी चरण सिंह घाट पर किया गया। पंचायत को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के चेयरमैन/ मलिक खाफ के बाबा राजेन्द्र सिंह मलिक ने कहा कि किसानो की समस्याओं को लेकर देश की सरकार गंभीर नहीं है। किसानी का।संकट गहराता जा रहा है। किसानो की रुचि खेती में नहीं है।खेती को बचाने का रास्ता संघर्ष से निकलना होगा। भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि किसानो की कोई आय नहीं है किसान घाटे की खेती कर रहा है।किसानो की उत्पादन लगात सरकार को वहन करता चाहिए।देशभर में किसानों को भूमिअधिग्रहण कानून में पुनर्वास का लाभ नहीं दिया जा रहा है। जिससे किसानो को नुकसान हो रहा है। देश में फल सब्जी का किसान मार रहा है। हर वर्ष छोटे मझौले 4%किसान खेती छोड़ रहे है। किसान मजदूर बनता जा रहा है। सरकार किसानो को खेती में रोजगार के अवसर पैदा कर किसान के बेटो को उनके ही क्षेत्र में रोजगार दे।किसानों की समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक का संघर्ष जारी रहेगा। पंचायत में जुलाई माह में लखनऊ विधानसभा का घेराव , अक्टूबर में उधमसिंहनगर से देहरादून तक किसान यात्रा निकालने का निर्णन किया गया।आगामी तीन माह में प्रत्येक जनपद में 1000 सदस्य नए बनाने की घोषणा की गई।
पंचायत को मांगेराम त्यागी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष,महेंद्र सेंधवा,राजवीर सिंह,दिगंबर सिंह,हरिनाम सिंह वर्मा प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश,सलवेंद्र सिंह कलसी प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड ,मुकेश सिंह प्रभारी युवा मध्य प्रदेश सहित सैकड़ो लोगों ने संबोधित किया। पंचायत में हजारों किसान देशभर से शामिल रहे।
पंचायत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी,श्री पुष्कर धामी मुख्यमंत्री उत्तराखंड के नाम ज्ञापन प्रशानिक अधिकारी को पंचायत स्थल पर दिया गया।
ज्ञापन
माननीय,श्री पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री उतराखंड सरकार, देहरादूनद्वारा – जिलाधिकारी हरिद्वार
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) द्वारा हरिद्वार में 9 से 11 जून 2024 तक तीन दिवसीय आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में देश के किसानों व कृषि के संबंध में चर्चा कर निम्नलिखित समस्या व उनके सुझाव आए है|
किसानो की समस्या का समाधान अविलंब करना चाहिए|
उतराखंड राज्य की पहाड़ी भूगोल और परिस्थितिया ही ऐसी है कि खेती योग्य ज़मीन कुल भूमि का केवल 10 या 15 प्रतिशत है। साथ ही प्रति परिवार औसतन एक हेक्टेयर से कम ज़मीन है, इसलिए पहाड़ों की आबादी के अस्तित्व के लिए फसलों की एमएसपी तय करना व् उसकी खरीद की व्यवस्था करना महत्वपूर्ण हैं। खेती से आमदनी नहीं होने के चलते अधिकांश लोग मैदानी इलाकों में पलायन कर गए है। लेकिन अब आपकी सरकार पर्वतीय क्षेत्रों में खेती को प्रोत्साहन दे रही है और खेती को रोजगार के रूप में देखा जा रहा है। यहाँ के किसानों की आय की बढ़ोतरी के लिए कुछ सुझाव निम्नलिखित है-
1. उतराखंड के फल-सब्जी उत्पादनों के लिए भी एमएसपी का प्रावधान किया जाये।
2. उतराखंड के गन्ना किसानों के बकाया भुगतान के लिए बेहतर व्यवस्था लागु की जाए ताकि 14 दिन से अधिक विलम्ब न हो अन्यथा ब्याज की व्यवस्था कानून द्वारा लागु हो।
3. उत्तराखंड में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना व मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना दोनों के अंतर्गत किसानों को सालाना दस हजार की सम्मान निधि मिलने का प्रावधान किया जाये।
4. उतराखंड के किसानों की फसल का जंगली जानवरों से नुकसान, भौगोलिक परिस्थितियां से नुकसान व वर्षा आधारित कृषि के चलते राज्य में पारंपरिक कृषि को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए बेहतर बीमा योजना लायी जाये। क्योकि इनसे होने वाले नुकसान के कारण खुद किसानों के परिवारों को अनाज और दाल के लिए सरकार से मिलने वाले राशन और बाज़ार पर निर्भर रहना पड़ता है।
5. मोटे अनाजों को प्रोत्साहित करने के लिए उनके बिक्री केंद्र बनाये जाए। इसी तरह जैविक खेती में किसानों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें फसलों का उचित दाम नहीं मिल पाता है। साथ ही दुर्गम इलाकों से बड़ी मंडियां काफी दूर हैं। जबकि उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति जैविक खेती के लिए पूर्णतः अनुकूल है। इस समस्या का हल छोटे- छोटे सरकारी बिक्री केंद बनाकर किया जाये।
6. उत्तराखंड के किसानो की वर्ग 4, 1 ख की भूमि नियमितकरण हेतु सरकार के शासनादेश 2000 के अनुसार ही शुल्क जमा कराया जाय। वर्तमान में शुल्क अधिक होने के कारण किसान अपनी भूमि नियमित कराने में असमर्थ है
7. देश के विभिन्न राज्यों की तर्ज पर उतराखंड के किसानो को भी निशुल्क बिजली दी जाये
हम उम्मीद करते है कि उपरोक्त सुझावों पर आपकी सरकार विचार करेंगी।
भवदीय
ज्ञापन
माननीय,
श्री नरेन्द्र मोदी जी
प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली।
द्वारा – जिलाधिकारी हरिद्वार
विषय – देश के किसानों की समस्याओं के संबंध में।
महोदय,
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) द्वारा हरिद्वार में 9 से 11 जून 2024 तक तीन दिवसीय आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में देश के किसानों व कृषि के संबंध में चर्चा कर निम्नलिखित समस्या व उनके सुझाव आए है|
भारत सरकार को किसानो की समस्या का समाधान अविलंब करना चाहिए :
1. न्यूनतम समर्थन मूल्य में राज्यों से फसल की लागत के मिलने वाले लागत मूल्य के आँकड़े के आधार पर एमएसपी लागत सी2 का डेढ़ गुना तय किया जाए। क्योकि केंद्र सरकार का फसल की लागत का आधार राज्यों से मिलने वाले लागत मूल्य से कम रहता है।इसी तरह ए2+एफएल और सी2 के फ़ार्मूले के बीच भी व्यापक अंतर है। कृषि लागत व मूल्य आयोग के स्थान पर न्यायाधिकरण बनाया जाये।कृषि निर्यात को अनुमान के आधार पर न रोका जाये, क्योंकि कृषि निर्यात को रोकने से किसान की कृषि उपज का मूल्य गिर जाता है।
2. सभी मुख्य फसलों के साथ ही मुख्य फल-सब्जी, दूध व शहद आदि को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के दायरे में लाया जाना चाहिए। व जिन फसलों का एमएसपी तय नहीं होता है, उन फसलों के लिए बाजार हस्तक्षेप योजना को प्रभावी बनाया जाये। क्योकि केंद्र व राज्यों के बीच का विषय होने के कारण योजना लागू होने में विलम्ब होता है या योजना लागू ही नहीं होती है।
3. न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे मूल्य जाने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित फसलों का न्यूनतम विक्रय मूल्य उसी तरह तय किया जाये, जिस तरह केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 की उप धारा (2) के खंड (ग) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए चीनी मूल्य (नियंत्रण) आदेश, 2018 अधिसूचित कर चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य तय किया था।
4. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में छोटे किसानों के लिए बीमा प्रीमियम शून्य होनी चाहिए, ताकि वे बीमा योजना का लाभ लें सके। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में हर फसल में किसान को इकाई माना जाए व वास्तविक नुकसान का मुआवजा मिलना चाहिए। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को बीमा योजना के अंतर्गत लाया जाये, जिससे किसानों को एक मासिक आय उपलब्ध सुनिश्चित हो सके।
5. देशभर में किसानो को भूमिअधिग्रहण कानून में पुनर्वास एवं स्थापन का लाभ नहीं दिया जा रहा है| किसानो को इसका लाभ दिया जाये
6. जलवायु परिवर्तन से कृषि को बचने हेतु वृहद कार्ययोजना लायी जाये
7. कृषि कारोबार से जुड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों को किसान की फसल उपजाने, उसकी खरीद, सप्लाई चेन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग समेत कृषि की पूरी वैल्यू चेन में जोडा जाये। देश में कृषि आंकड़ों की प्रणाली को मजबूत किया जाये।
8. किसानो के सभी क़र्ज़ माफ़ किये जाये
9. एक चीनी मिल लगाने के लिए दूसरी चीनी मिल की न्यूनतम दूरी मानदंड को कम किया जाये या समाप्त किया जाए ।केंद्र सरकार द्वारा घोषित किए जाने वाले गन्ने के फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस (एफआरपी) को 10.25 प्रतिशत के चीनी रिकवरी के आधार स्तर पर बढ़ाया जाये, क्योंकि पहले यह रिकवरी आधार 9.50 था।गन्ना भुगतान 14 दिन में न मिलने पर ब्याज देय के केन्द्रीय ‘गन्ना नियंत्रण आदेश 1966’ की धारा 3 (3 अ) को सभी राज्यों में लागू किया जाये। ताकि राज्य सरकार को ब्याज को माफ़ करने का अधिकार न रहे।
10. किसान सम्मान निधि को बढ़ाकर 12,000 सालाना किया जाये।
धर्मेन्द्र मलिक राष्ट्रीय प्रवक्ता ने बताया कि पंचायत में बाबा राजेंद्र सिंह मलिक राजेश सिंह चौहान मांगेराम त्यागी संरक्षक/ चेयरमैन राष्ट्रीय अध्यक्ष राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह रंधावा धर्मेंद्र मलिक जावेद तोमर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राष्ट्रीय महासचिव / प्रवक्ता राष्ट्रीय सचिव उम्मेद सिंह राजवीर सिंह हरिनाम सिंह वर्माा राष्ट्रीय सचिव संस्थापक सदस्य प्रदेश अध्यक्ष उत्तर सलवेन्द्र सिंह कलसी जगदीश सिंह दिगम्बर सिंह प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष मध्य प्रदेश युवा प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश मुकेश कुशवाहा विक्की राठी विक्रम सिंह गौराया युवा प्रदेश प्रभारी मध्य प्रदेश जिला प्रभारी हरिद्वार जिला अध्यक्ष उधमसिंह नगर आदि उपस्थित थे।

