नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली नई मंत्रिपरिषद में उतर प्रदेश का दबदबा घट सकता है। बताते हैं कि मंत्री पदों को लेकर फार्मूला तैयार है। इस बार बिहार और आंध्र प्रदेश का अधिक प्रतिनिधित्व हो सकता है। हालांकि, सरकार में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है, क्योंकि यहां भाजपा की 29 सीटें कम हुई हैं। इसके बावजूद 2027 में विधानसभा चुनाव को देखते हुए यूपी को कुछ रियायत मिल सकती है। साथी दलों रालोद आदि को भी हिस्सेदारी मिल सकती है। कुछ पराजित चेहरे भी सरकार का हिस्सा बन सकते हैं। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में 72-सदस्यीय मंत्रिपरिषद में, यूपी के 13 सांसद मंत्री थे। इनमें से इस बार स्मृति ईरानी, महेंद्र नाथ पांडे, संजीव बालियान, कौशल किशोर जैसे मंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा है। महाराष्ट्र में निवर्तमान मंत्रिपरिषद में 9 मंत्री थे। महाराष्ट्र में इस बार एनडीए 48 सीटों में से केवल 17 सीटें ही जीत सका। वहीं 2019 में एनडीए (अविभाजित शिवसेना और बीजेपी) ने 42 सीटें (अमरावती सहित जहां एनडीए समर्थित उम्मीदवार ने जीत हासिल की थी) जीती थीं। सूत्रों की मानें तो लोकसभा में 12 और राज्यसभा में 4 सांसदों वाला जनता दल (यूनाइटेड) केंद्र की एनडीए सरकार में रेलवे, ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग चाहता है। जेडीयू के राज्यसभा सांसदों में संजय कुमार झा शामिल हैं, जो बुधवार को एनडीए नेताओं की बैठक में बिहार के सीएम नीतीश कुमार के साथ थे। बिहार में एनडीए ने 40 में से 30 सीटें जीती हैं। इनमें भाजपा की 12, जदयू की 12, लोजपा (रामविलास) की 5 और हम (सेक्युलर) की 1 सीट शामिल है।
जदयू के जिन सांसदों को केंद्र में मंत्री बनाया जा सकता है, उनमें राजीव रंजन ‘ललन’ सिंह और कौशलेंद्र कुमार शामिल हैं। बता दें कि ललन सिंह मुंगेर से जीते हैं, जबकि कौशलेंद्र कुमार बिहार के सीएम नीतीश के गृह जिले नालंदा से जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के मुखिया और बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी गया से चुनकर लोकसभा में पहुंचे हैं और उन्हें भी मोदी सरकार में जगह मिल सकती है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के चिराग पासवान को कैबिनेट में जगह मिल सकती है। हालांकि, चिराग ने कहा है कि उनकी पार्टी का बीजेपी और पीएम मोदी को बिना शर्त समर्थन है।

