कांवडियों पर फूल तो सड़क पर नमाज में क्या दिक्कत है: ओवैसी

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नई दिल्ली। एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल उठाया है कि यदि कांवड़ियों के लिए ट्रैफिक को डायवर्ट किया जा सकता है तो फिर नमाज से ही क्या दिक्कत है। उन्होंने कहा कि ऐसा है तो फिर हमें भी सड़कों पर नमाज पढ़ने दी जाए। आर्टिकल 25 के तहत सभी को धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार है। लुलु मॉल में नमाज पर ऐक्शन हुआ, जबकि 18 सेकेंड में यह खत्म हो जाती है। नमाज पढ़ने से किसी को क्या नुकसान हो जाता है। यह तो एक समुदाय से भेदभाव का मामला है। ओवैसी ने कहा कि इस तरह से आप एक समुदाय से भेदभाव कर रहे हैं, जो संविधान के खिलाफ है। इस पर भाजपा वाले आर्टिकल 25 का हवाला देंगे, लेकिन फिर यह भी बताएं कि नमाज पढ़ने से किसे दिक्कत है और उन्हें क्या नुकसान हो रहा है। यदि आपका नारा सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास है तो इस तरह का काम उसके मुताबिक तो नहीं है।
उन्होंने अखबार की कटिंग शेयर करते हुए ट्वीट किया, ‘पुलिस ने पंखुड़ियां बौछार की। कांवड़ियों का झंडों से इस्तक़बाल किया, उनके पैरों पर लोशन लगाया और उनके साथ इंतेहाई शफ़क़त से पेश आए। दिल्ली पुलिस ने लोहारों को हटाने की बात की ताकि कांवड़िया नाराज़ न हो जाए। उत्तर प्रदेश की हुकूमत ने यात्रा के रास्तों पर गोश्त पर पाबंदी लगा दी। अगर इन पर फूल बरसा रहे हैं, तो कम से कम हमारे घर तो मत तोड़िए।’ उन्होंने इस बारे में मीडिया से बात करते हुए कहा कि हमारा संविधान सेक्युलर है और वह किसी भी धर्म के प्रति नफरत या प्यार की बात नहीं करता।

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