मुजफ्फरनगर। पूर्व विधायक शाहनवाज राना के बेटे अब्दुल आहाद राना के जमानत के लिए खालापार कोतवाली के प्रभारी और चौकी इंचार्ज के फर्जी हस्ताक्षर और मोहर व जमानतियों के नकली दस्तावेजों से नकली जमानत तस्दीक करा दी। इसके आधार पर राना की जेल से रिहाई हो गई।
पुलिस अधीक्षक नगर सत्यनारायण प्रजापत के संज्ञान मामला आने के बाद सीओ सिटी सिद्धार्थ द्वारा की गई गोपनीय जांच में मामले का होने के बाद अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। मामले के सूत्रधारों की जांच की जा रही है। इससे पूर्व विधायक शाहनवाज राना और उनके परिवार की मुश्किलें बढ गई हैं।
जीएसटी विभाग के राना स्टील पर छापे के दौरान टीम पर हमले के मामले में पूर्व विधायक शाहनवाज राना को जेल भेजा गया था। राना को जेल में मोबाइल पहुंचाने के मामले में बेटे अब्दुल आहाद राना को गिरफ्तार किया गया था। आहाद राना की जमानत मंजूर होने के बाद दो जमानतियों के दस्तावेज 11 नवंबर 2025 को खालापार कोतवाली भेजे गए थे। पुलिस ने जमानत तस्दीक नहीं की और 12 नवंबर को आहाद राना की रिहाई हो गई।
पुलिस अधीक्षक नगर सत्यनारायण प्रजापत के संज्ञान में आने के बाद पूरे मामले की जांच सीओ सिटी सिद्धार्थ के मिश्रा ने गोपनीय रूप से की तो जांच के दौरान पाया कि अज्ञात लोगों ने असली जमानतियों की नकली दस्तावेजों से जमानत तस्दीक कराकर आहाद राना की रिहाई करा दी। रिपोर्ट में आया है कि जमानत तस्दीक करने वालों ने खालापार कोतवाली प्रभारी महावीर सिंह चौहान, चौकी प्रभारी की फर्जी मोहर और जाॅली हस्ताक्षर कर दिए। जमानत तस्दीक दस्तावेज पर चौकी प्रभारी का नाम भी गलत लिखा गया है। तथ्यों के आधार पर सिविल लाइन थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ जमानत मुकदमा दर्ज करा दिया। एसपी सिटी प्रजापत ने बताया कि फर्जी दस्तावेजों से जमानत तस्दीक कराकर न्यायालय को गुमराह करने का काम किया गया है। अब उन लोगों कि तलाश की जा रही है जिन्होंने यह गडबड़ी की।


