मुजफ्फरनगर। एक ही मुकदमें में इस कांड़ से पहले 36 लोगों को एक साथ सजा नहीं हुई थी। दिनांक 24.08.2023 को तत्कालीन अपर जिला जज श्री शक्ति सिंह द्वारा महमूदनगर कांड की सुनवाई करते हुए 36 लोगों को 10-10 वर्ष की सजा सुनायी गई थी। निर्णय के समय उक्त प्रकरण में आजाद पुत्र फारूख फरार हो गया था तथा सउदी अरब चला गया था, जिस कारण न्यायालय द्वारा उक्त अभियुक्त की पत्रावली पृथक कर दी गयी थी। तद्ोपरान्त अभियुक्त आजाद द्वारा न्यायालय में अब आत्मसमर्पण किया गया।
अभियोजन कथानक के अनुसार दिनांक 14.02.2003 को समय 8ः40 ए.एम. पर थानाध्यक्ष सिविल लाइन्स बलजीत सिंह को सिटी कन्ट्रोल रूम द्वारा बताया गया कि महमूद नगर में जाकिर सभासद व उस्मान प्रधान के पक्ष के लोगों में जबरदस्त झगड़ा हो रहा है तथा दोनों पक्ष आपस में एक-दूसरे पर पथराव, फायरिंग, कांच की बोतलें, लाठी-डंडे, तबल, तलवार आदि से लैस होकर घटना कर रहे हैं तथा साजिद के घर में आग लगा दी गयी। पुलिस द्वारा साजिद मकान में लगी आग को बुझाने का प्रयास किया गया तथा मौके से 60 से अधिक दंगाईयों को गिरफ्तार किया गया था।
मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद ट्रायल चला तथा जनपद में तैनात तत्कालीन अपर जिला जज श्री शक्ति सिंह द्वारा 36 अभियुक्तगणों को दोषसिद्ध करते हुए निर्णय पारित किया गया था।
निर्णय में अपर जिला जज श्री शक्ति सिंह द्वारा यह उल्लेख किया गया था कि- “उक्त प्रकरण की घटना में जिस मकान में कई महिलायें एवं बच्चे फंसे हुये थे, उस घर में आग लगा दी गयी। आग में फंसे हुये बच्चों में आशमा उम्र साढ़े 5 वर्ष, हमजा उम्र 3 वर्ष, हुदा उम्र पौने 2 वर्ष, सुहैल उम्र 12 वर्ष जैसे छोटे-छोटे बच्चे थे। कुछ बच्चे सद्दीक उम्र पौने 2 महीने व उमर उम्र पौने 2 महीने के थे, जिनका जन्म हुये चंद महीने हुये थे तथा जिन्होंने अभी तक ठीक से न तो दुनिया देखी थी और न ही अभी चलना जानते थे और वे आग से बचकर भाग नहीं सकते थे। इनकी पुकार सुनकर जब पुलिस अधिकारी, कर्मचारी मौके पर पहुंचते हैं, तब उन पर सिर्फ इसलिये हमला कर दिया जाता है कि वे अपने कर्तव्यपालन में इन बच्चों को बचाने चले जाते हैं। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं सी.डी.ओ. जैसे तमाम आला अधिकारियों की मौजूदगी में खुलकर पुलिस बल के साथ अभद्रता की गयी, पथराव किया गया, जिसमें तत्कालीन पुलिस अधीक्षक नगर, क्षेत्राधिकारी नगर, थानाध्यक्ष सिविल लाइन्स सहित अन्य पुलिसकर्मी घायल हुये थे। दंगाईयों के कृत्य के कारण पूरे शहर में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो गयी तथा लोक व्यवस्था भंग हो गयी।”

