मुजफ्फरनगर। थाना बुढ़ाना पुलिस द्वारा फर्जी/कूटरचित दस्तावेज तैयार कर लोन दिलाने के नाम पर आनलाईन ठगी करने वाले 02 अभियुक्तगण को किया गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार अभियुक्तगण के कब्जे से 04 मोबाईल फोन, 03 आधार कार्ड, 01 पेनकार्ड, 01 डेबिट कार्ड, 02 क्रेडिट कार्ड व 10,730/- रूपये बरामद हुए।
27 जनवरी को वादी सतीश चन्द्र ओझा, उपप्रबन्धक बजाज हिन्दुस्तान शुगर मील लिमिटेड, भसाना बुढ़ाना, मुजफ्फरनगर ने थाना बुढ़ाना पुलिस को लिखित तहरीर देकर अवगत कराया कि अभियुक्तगण द्वारा वादी से लोन देने के नाम पर कूटरचित/फर्जी दस्तावेज तैयार कर आनलाईन के माध्यम से अलग-अलग खातों में कुल 3,98,000/- रूपये ट्रान्सफर करा लिये है। प्राप्त तहरीर के आधार पर थाना बुढ़ाना पुलिस द्वारा मु0अ0सं0 49/2026 धारा 318(4),338,336(3),340(2) बीएनएस व 66 आईटी एक्ट पंजीकृत किया गया तथा घटना के अनावरण हेतु थाना बुढ़ाना पर पुलिस टीम का गठन किया गया। गठित टीम द्वारा उक्त अभियोग में नामित/प्रकाश में आये 02 अभियुक्तगण को मुखबिर की सूचना पर भसाना शुगर मिल से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार अभियुक्तगण के कब्जे से 04 मोबाईल फोन, 03 आधार कार्ड, 01 पेनकार्ड, 01 डेबिट कार्ड, 02 क्रेडिट कार्ड व 10,730/- रूपये बरामद किये गये है। अभियुक्तगण की गिरफ्तारी एवं बरामदगी के सम्बन्ध में थाना बुढ़ाना पुलिस द्वारा अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है।
गिरफ्तार अभियुक्तगण का नाम व पता सोनू उर्फ आशीष गुप्ता उर्फ विशाल नेहरा उर्फ विनय पाण्डेय पुत्र स्व0 चन्दभूषण उर्फ शकील निवासी गली नं0-2 जी ब्लाक शिवमन्दिर के पास गोविन्दपुरम, गाजियाबाद व सागर प्रताप सैनी पुत्र स्व0 चन्दभूषण निवासी गली नं0-2 जी ब्लाक शिवमन्दिर के पास गोविन्दपुरम, गाजियाबाद बताया गया है।
*बरामदगी का विवरण-*
✔️ 04 मोबाईल फोन
✔️ 03 आधार कार्ड
✔️ 01 पेनकार्ड
✔️ 01 डेबिट कार्ड
✔️ 02 क्रेडिट कार्ड
✔️ 10,730/- रूपये
अभियुक्तगण द्वारा लोगों को लोन दिलाने का झांसा देकर उनसे धोखाधड़ी की जाती है। अभियुक्त फर्जी/कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर तैयार किए गए विभिन्न बैंक खातों में पीड़ितों से धनराशि मंगवाते हैं। अभियुक्तगण प्रायः व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से संपर्क करते हैं तथा कार्य पूर्ण होने के पश्चात प्रयुक्त सिम कार्ड को तोड़कर नष्ट कर देते हैं, जिससे उनकी पहचान स्थापित न हो सके। पीड़ित को विश्वास में लेने के लिए अभियुक्तगण लोन स्वीकृति पत्र (Sanction Letter) भेजते हैं, जिससे वादी को यह विश्वास हो जाता है कि उसका लोन स्वीकृत हो गया है। इसके उपरांत अभियुक्तगण प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज, जीएसटी, इंश्योरेंस आदि विभिन्न मदों के नाम पर कभी एक खाते में तो कभी अन्य खातों में अलग-अलग धनराशि जमा कराते हैं। जब पीड़ित की धनराशि फँस जाती है तो अभियुक्तगण उसे उसके जमा किए गए धन की वापसी अथवा लोन शीघ्र जारी होने का लालच देकर बार-बार और धनराशि की मांग करते रहते हैं। पीड़ित अपने पूर्व में जमा धनराशि वापस पाने की आशा में अभियुक्तों की बातों में आकर पुनः धनराशि जमा करता रहता है। इस प्रकार अभियुक्तगण योजनाबद्ध तरीके से पीड़ित से धोखाधड़ी कर धन ऐंठते हैं तथा अंततः संपर्क समाप्त कर फरार हो जाते थे।


