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धनतेरस व दीपावली पूजन के लिए विशेष मुहूर्त्त 

मुज़फ्फरनगर में सिविल लाईन थाने के सामने प्रसिद्ध धार्मिक संस्थान विष्णु लोक के संचालक पंण्डित विनय शर्मा ने बताया कि वैदिक धर्म के अन्तर्गत प्रत्येक त्यौहार का अलग अलग महत्व है, लेकिन पंचमहोत्सव दीपावली का त्यौहार सबसे अधिक महत्व रखता हैं। इस त्यौहार से हमारी अनेकों सामाजिक एवं धार्मिक परम्पराऐं जुडी हुई है।

1. धनत्रयोदशी धनवन्तरि जयन्ती (18 अक्टूबर 2025)- धनत्रयोदशी आयुर्वेद के प्रवर्तक भगवान धनवन्तरि का अवतार पर्व भी है। इस पर्व का उद्देश्य कुटुम्ब में असाध्य रोगों, अकाल मृत्यु से छुटकारा पाने के लिए धनवन्तरि भगवान का पूजन किया जाता है। इस दिन महामृत्युज्जय यंत्र की विशेष रूप से पूजा की जाती है। महामृत्युज्जय यंत्र रोग-शोक नाशक होता हैं सांयकाल के समय यमराज के लिए एक आटे का चौमखा दीपक घर से बाहर रखा जाता है।

2. छोटी दीपावली हनुमत जयन्ती, नरक चतुर्दशी ( 19 अक्टूबर 2025)- इस दिन हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है बन्दरों को मीठा रोट व गुड़ चने खिलाये जाते हैं। छोटी दीपावली में भी कम से कम 11 दीपक जरूर जलाने चाहिए। शाम के समय दो तेल के चौमुखे दीपक, दो नीले रूमाल, कुछ काले उडद, दो लोहे की कीलें, दो इमरती पीपल की ज डमें रख दें या दरिया मे विसर्जित कर आएँ।

3. बड़ी दीपावली, कार्तिक अमावस्या (20 अक्टूबर 2025)- यह पंच महोत्सव दीपावली का विशेष दिवस माना जाता है। इस दिन गणपति-महालक्ष्मी, कुबेर, षोड़शमातृका, नवगृह, कलश, दीपक, सरस्वती, महाकाली, कलमदवात, डायरी-बहीखाता, बाट-तराजू, आदि का विशेष रूप से पूजन किया जाता है बाद में लक्ष्मी जी की आरती करते हुए सभी देवताओं से क्षमा याचना की जाती है कि हमारे आज के पूजन में कोई गलती हो गयी हो तो उसे क्षमा करें। कहते हैं कार्तिक अमावस्या वाले दिन लक्ष्मी मृत्युलोक में विचरण करती है अतः उनके स्वागत के निमित्त कार्तिक अमावस्या में रात्रि में सोना नहीं चाहिए। इस दिन दुकान या व्यापार स्थल में पूजन के लिए दोपहर 2 बज कर 13 मिनट से वा 3 बज कर 44 मिनट तक, घर मंे पूजन के लिए प्रदोष काल संाय 6 बज कर 51 मिनट से 8 बज कर 48 मिनट तक और रात्रि में तांत्रिकों के लिए अथवा महाकाली पूजन के लिए रात्रि 1 बज कर 19 मिनट से 3 बज कर 33 मिनट तक विशेष पूजन मुहूर्त्त है।

4. गोवर्धन पूजा (22 अक्टूबर 2025) – ये त्यौहार माध्यान्ह में मनाया जाता है। इस पर्व पर भगवान कृष्ण, इन्द्र, वरूण अग्मिन आदि देवताओं की पूजा की जाती है। अपने-अपने घर में वर्तमान ऋतु सम्बन्धी सब्जी और पकवान आदि बनाकर प्रसाद आदि बांटा जाता है। कहीं-कहीं सामुहिक रूप से धर्मस्थलों पर पूजा करके प्रसाद वितरित होता है। इस दिन संध्या के समय दैत्यराज बलि की भी पूजा की जाती है।

5. भैय्या दूज-यमद्वितीया (23 अक्टूबर 2025)- भविष्योत्तर पुराण के अनुसार इस पर्व का यम और उसकी बहन यमुना (यमी) से भी सम्बन्ध है। इस दिन बहन टीका लगाकर भाई को गोला देकर भोजन कराये इस पर्व पर जो भाई अपनी बहन के घर जाकर उसके हाथ का बना भोजन ग्रहण करता है वह धन-धान्य से परिपूर्ण रहता है।

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Author: Taja Report

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