मुजफ्फरनगर। भाकियू अ प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे पत्र में खतौनी में नाम एवं अंश निर्धारण की त्रुटियों के कारण फार्मर रजिस्ट्री से वंचित किसानों की समस्याओं के समाधान की मांग की है।
पत्र में कहा गया है कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा देशभर में किसानों की फार्मर रजिस्ट्री तैयार करने का अभियान चलाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में भी यह कार्य तेजी से कराया जा रहा है, किन्तु प्रदेश के अनेक जिलों में बड़ी संख्या में किसान रियल टाइम खतौनी में नाम एवं अंश निर्धारण की त्रुटियों के कारण फार्मर रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे हैं।
राजस्व अभिलेखों में इन त्रुटियों के चलते किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। फार्मर रजिस्ट्री न होने के कारण किसानों के प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं से वंचित होने की आशंका है। इसके साथ ही खतौनी में नाम अथवा अंश की त्रुटि के कारण किसानों को कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) तथा अन्य कृषि संबंधी सुविधाओं का लाभ भी प्राप्त नहीं हो पा रहा है।
हाल ही में राज्य सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि 1 जून से जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री नहीं होगी, उन्हें रासायनिक खाद उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। यह निर्णय उन किसानों के लिए अत्यंत चिंताजनक स्थिति पैदा कर रहा है, जिनकी फार्मर रजिस्ट्री राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में हुई त्रुटियों के कारण अब तक नहीं बन पाई है।
प्रदेश के किसान पिछले लगभग दो वर्षों से अपनी खतौनी में नाम एवं अंश की त्रुटियों को ठीक कराने के लिए तहसीलों के चक्कर काट रहे हैं, किन्तु राजस्व विभाग की शिथिल कार्यप्रणाली के कारण इन समस्याओं का समयबद्ध समाधान नहीं हो पा रहा है। विभागीय त्रुटियों का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है, जिससे वे कृषि निवेश, बैंक ऋण और सरकारी योजनाओं से वंचित हो रहे हैं।
यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आगामी फसल चक्र में इसका सीधा प्रभाव कृषि उत्पादन और किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी।
अतः आपसे आग्रह है कि इस गंभीर विषय का संज्ञान लेते हुए प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों एवं राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया जाए कि प्रत्येक गांव में विशेष राजस्व चौपाल आयोजित कर किसानों की खतौनी में नाम एवं अंश निर्धारण से संबंधित त्रुटियों का अभियान चलाकर अधिकतम एक माह के भीतर समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों की फार्मर रजिस्ट्री समय पर पूरी हो सके और वे सरकारी योजनाओं से वंचित न रहें।
प्रदेश का किसान सरकार से न्यायपूर्ण और त्वरित समाधान की अपेक्षा करता है।


