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मुज़फ्फरनगर के रेशू परिवार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला की पत्नी डॉ. अमिता बिड़ला को किया गुड़-शक्कर भेंट, शुकतीर्थ आने का दिया निमंत्रण

मुज़फ्फरनगर। देहरादून से दिल्ली लौटते समय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला की पत्नी डॉ. अमिता बिड़ला का मुज़फ्फरनगर के सच्‍चे आतिथ्य और पारंपरिक मिठास से हुआ विशेष परिचय, जब सामाजिक कार्यों में सक्रिय सत्यप्रकाश रेशू अपने परिवार के साथ उनसे भेंट करने पहुंचे। मुलाकात के दौरान सत्यप्रकाश रेशू ने डॉ. अमिता बिड़ला को मुज़फ्फरनगर की प्रसिद्ध पहचान—गुड़ और शक्कर—भेंट कर जिले की परंपराओं और समृद्ध कृषि संस्कृति का संदेश पहुंचाया। रेशू परिवार ने उन्हें शुकतीर्थ आने का निमंत्रण भी दिया, जिसे स्वीकार करते हुए डॉ. अमिता बिड़ला ने शीघ्र ही शुकतीर्थ आने और वट वृक्ष के दर्शन करने की इच्छा जताई।

इस अवसर पर सत्यप्रकाश रेशू के साथ उनकी पत्नी शैला गर्ग, भाभी साधना गर्ग और पुत्र शोभित गर्ग भी उपस्थित रहे। डॉ. अमिता बिड़ला ने परिवार की उपलब्धियों के बारे में जानकर उन्हें भरपूर आशीर्वाद दिया और समाज, देश व धर्म के कार्यों में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवार समाज की सकारात्मक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

सत्यप्रकाश रेशू ने बातचीत के दौरान डॉ. अमिता बिड़ला को मुज़फ्फरनगर की जनशक्ति, बौद्धिक क्षमता और आर्थिक योगदान की जानकारी दी। उन्होंने जिले के प्रमुख उद्योगों—लोहा उद्योग, शुगर उद्योग और पेपर उद्योग—की मजबूती तथा देश की अर्थव्यवस्था में इनके योगदान का विस्तृत परिचय कराया। यह सुनकर डॉ. अमिता बिड़ला ने मुज़फ्फरनगर की प्रगति और सांस्कृतिक पहचान की सराहना की और कहा कि वह अपने पूरे परिवार के साथ जल्द ही शुकतीर्थ और मुज़फ्फरनगर की यात्रा करना चाहेंगी। इस पर रेशू परिवार की श्रीमती शैला गर्ग, साधना गर्ग और शोभित गर्ग ने उनसे आग्रह किया कि इस यात्रा में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को भी साथ लाएँ ताकि वह स्वयं मुज़फ्फरनगर की सांस्कृतिक समृद्धि, धार्मिक महत्व और औद्योगिक प्रगति का अवलोकन कर सकें।

डॉ. अमिता बिड़ला की इस निजी यात्रा में उनकी बहन अर्चना, सोनिया, उनकी मित्र जूही, गरिमा दिक्षित, सरिता जोशी और पुनीता बिजेंद्र मीना भी साथ रहीं। पूरे समय वातावरण सौहार्द, अपनत्व और सांस्कृतिक सौहाद्र्र से भरा रहा। रेशू परिवार द्वारा किया गया यह आत्मीय स्वागत न केवल जिले की पुरानी परंपराओं का प्रतीक था, बल्कि यह भी दर्शाता है कि मुज़फ्फरनगर अपनी पहचान, संस्कृति और अतिथि सत्कार को लेकर कितना समृद्ध और जागरूक है।

यह मुलाकात न सिर्फ एक सम्मानजनक भेंट रही, बल्कि आने वाले समय में मुज़फ्फरनगर को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान दिलाने का सेतु भी बन सकती है।

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Author: Taja Report

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