नेशनल नेचुरोपैथी डे-2025 8वे नेचुरोपैथी डे के उपलक्ष्य में प्राकृतिक आहार विषय पर कार्यशाला का आयोजन।
नेचुरोपैथी के समर्थक महात्मा गांधी जी को श्रद्धा सुमन किये गए अर्पित।
नेचुरोपैथी के क्षेत्र में कार्य कर रहे नेचुरोपैथ को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंटकर किया गया सम्मानित।
8वा प्राकृतिक चिकित्सा दिवस आई. एन. ओ., एन. आई. एच. तथा इंडियन योग एसोसिएशन के मार्गदर्शन में किया गया।
आयुष मंत्रालय,भारत सरकार वर्ष 2018 से निरन्तर मना रहा है नेचुरोपैथी डे
मुजफ्फरनगर ।8वे प्राकृतिक चिकित्सा दिवस के अवसर पर लाला चतर सैन जैन प्राकृतिक चिकित्सालय, अतिशय क्षेत्र वहलना, जनपद मुज़फ्फरनगर में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
प्राकृतिक चिकित्सा के समर्थक महात्मा गांधी जी को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए प्राकृतिक आहार विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई।
प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य कर रहे नेचुरोपैथ श्री धीरेंद्र गुप्ता एवं श्री ऋषभ गुप्ता को श्री प्रवेंद्र दहिया व डॉ राजीव कुमार द्वारा स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।
होली चाइल्ड पब्लिक इंटर कॉलेज जड़ौदा के विद्यार्थियों को भ्रमण के दौरान प्राकृतिक चिकित्सा के विषय में विस्तृत जानकारी व शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई गई।
भारत सरकार ने 2018 से प्रत्येक वर्ष 18 नवंबर को प्राकृतिक चिकित्सा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
यह दिन 18 नवंबर 1945 के ऐतिहासिक अवसर की याद दिलाता है, जब महात्मा गांधी अखिल भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा फाउंडेशन ट्रस्ट के आजीवन अध्यक्ष बने और इसके कार्य पर हस्ताक्षर किए – एक ऐतिहासिक घटना जो प्राकृतिक जीवन के माध्यम से स्वास्थ्य सशक्तिकरण के लिए भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
प्रत्येक वर्ष 18 नवंबर को नेशनल नेचुरोपैथी डे (National Naturopathy Day) मनाया जाता है।नेचुरोपैथी से मतलब औषधि मुक्त चिकित्सा पद्धतियों का इस्तेमाल कर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है।
आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा इसे 2018 में शुरू किया गया था।
नेचुरोपैथी का मानना है कि बिना दवाइयों के भी शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है।
नेचुरोपैथी में जल चिकित्सा से लगाकर सन बाथ तक को फायदेमंद माना गया है।
आयुष मंत्रालय का गठन 09 नवंबर 2014 को हमारी चिकित्सा की प्राचीन प्रणालियों के गहन ज्ञान को पुनर्जीवित करने और स्वास्थ्य देखभाल की आयुष प्रणालियों के इष्टतम विकास और प्रचार को सुनिश्चित करने की दृष्टि से किया गया था।
इससे पहले, 1995 में गठित भारतीय चिकित्सा पद्धति और होम्योपैथी विभाग (आईएसएम एंड एच) इन प्रणालियों के विकास के लिए जिम्मेदार था।
इसके बाद नवंबर 2003 में आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी (आयुष) विभाग के रूप में इसका नाम बदलकर आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी में शिक्षा और अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित किया गया।
वर्ष 2018 से, आयुष मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय, राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान (एनआईएन), पुणे, प्राकृतिक चिकित्सा के दर्शन और अभ्यास को बढ़ावा देने के लिए विशिष्ट वार्षिक विषयों पर राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम आयोजित करके इस दिन को बड़े उत्साह के साथ मनाता आ रहा है।
8वा प्राकृतिक चिकित्सा दिवस आई एन ओ, एन आई एच तथा इंडियन योग एसोसिएशन के मार्गदर्शन में किया गया। उक्त आयोजन में योगाचार्य श्री सतकुमार व योगाचार्य श्री योगेश कुमार तथा संस्थान स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


