मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश में यूजीसी कानून को लेकर जहां एक ओर भाजपा के कई नेता और प्रशासनिक अधिकारी इस्तीफे मामला गरमा गया है , वहीं दूसरी तरफ स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल का इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट बयान न देना अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं का कारण बन गया है। खास बात यह है कि मंत्री स्वयं स्वर्ण समाज से आते हैं, ऐसे में उनकी चुप्पी को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं।
मंगलवार को नगर के एक विद्यालय में भारतीय भाषा, संस्कृति और परंपरा विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी में मंत्री कपिल देव अग्रवाल शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति की महत्ता, शिक्षा परंपरा और सांस्कृतिक विरासत पर विस्तार से विचार रखे।
हालांकि, जब मीडिया ने उनसे सीधे तौर पर यूजीसी कानून को लेकर सवाल किया, तो मंत्री ने कोई जवाब देने के बजाय मुस्कुराते हुए चैनल की आईडी पर हाथ रखा और बिना कुछ कहे वहां से निकल गए। उनके इस व्यवहार ने मौके पर मौजूद लोगों और मीडिया के बीच कई सवाल खड़े कर दिए।
कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान मंत्री ने कहा कि शाकंभरी विश्वविद्यालय की कुलपति, प्रधानाचार्य सुधीर कुमार और अन्य प्रतिभागियों के साथ भारतीय भाषा और संस्कृति पर सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि मुगलों द्वारा लाखों पुस्तकों को जलाने के बावजूद भारतीय संस्कृति जीवित रही और आज भी पूरी दुनिया को संस्कार देने का कार्य कर रही है।
मंत्री ने यह भी कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और उनमें गौरव की भावना पैदा करने के लिए जरूरी हैं।
हालांकि, यूजीसी कानून जैसे संवेदनशील मुद्दे पर उनकी चुप्पी ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मंत्री कपिल देव अग्रवाल इस कानून को लेकर आगे क्या रुख अपनाते हैं।


