मुजफ्फरनगर। जनपद में जौली रोड स्थित भंडूरा गांव में चल रहा श्री बालाजी एंटरप्राइजेज टायर रिसाइक्लिंग प्लांट आखिरकार बंद कर दिया गया है। लंबे समय से इलाके में जहरीला काला धुआं छोड़कर पर्यावरण और लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे इस प्लांट पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्रवाई की है।मीडिया में लगातार सामने आ रही खबरों के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मामले का संज्ञान लिया। 24 नवंबर 2025 को बोर्ड की टीम ने स्थानीय अधिकारी गीतेश चंद्रा के नेतृत्व में रात के समय प्लांट का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आईं।
रिएक्टर से निकलता काला धुआं, खुले में टायर जलाना और अत्यधिक धूल उड़ना—ये सभी गतिविधियां नियमों का खुला उल्लंघन पाई गईंनिरीक्षण के बाद प्लांट मालिक जतिन पाल को नोटिस जारी किया गया और एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा गया। तय समय में कोई जवाब न मिलने पर विभाग ने छापेमारी कर प्लांट का संचालन पूरी तरह बंद करा दिया।।सूत्रों के अनुसार, प्लांट मालिक अब इसे बेचने की कोशिश कर रहा है। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि क्या केवल प्लांट बंद करना ही पर्याप्त है, या फिर पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन को लेकर मालिक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए।प्लांट पर काम कर रहे कई मजदूरों और कर्मचारियों का आरोप है कि महीनों की सैलरी बकाया है। मजदूरी मांगने पर उन्हें धमकियां दी जा रही हैं। मजदूरों का कहना है कि वे अब पुलिस और श्रम विभाग का रुख करेंगे।
एक मजदूर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जान जोखिम में डालकर काम कराया गया, लेकिन मेहनताना नहीं मिलापुराने टायरों से तेल निकालने की प्रक्रिया के कारण इलाके में भारी प्रदूषण फैल रहा था, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की सेहत पर असर पड़ रहा था। अब प्लांट बंद होने से आसपास के गांवों में राहत जरूर है, लेकिन सवाल अब भी कायम हैं—
क्या प्लांट मालिक पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होगा?
मजदूरों की बकाया सैलरी कब मिलेगी?
आग में झुलसे कर्मचारियों को मुआवजा मिलेगा या नहीं?
फिलहाल कार्रवाई से राहत जरूर मिली है, लेकिन न्याय की पूरी तस्वीर अभी बाकी है।।


