मुज़फ्फरनगर। जनपद मुज़फ्फरनगर में पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठे हैं। अब तक घर से उठाकर जंगल में ले जाकर गोली मार देने की ही शिकायत सामने आती थी लेकिन अब कचहरी से उठाकर युवक को फर्जी मुठभेड़ में गोली मारने का मामला सामने आया है ।
एक युवक द्वारा कोर्ट परिसर में रोते हुए अपनी जान बचाने की गुहार लगाने वाला वीडियो सामने आने के अगले ही दिन पुलिस ने उसे मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली मारकर गिरफ्तार कर लिया। परिजनों और वकील ने फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस का कहना है कि आरोपी शातिर अपराधी है और घेराबंदी के दौरान उसने पुलिस पर फायरिंग की।
वकील के चैंबर में रोते हुए युवक बोला— “मेरी जान बचा लो, एसओजी घात लगाए बैठी है”
करीब ढाई मिनट के वायरल वीडियो में कैलाशपुर निवासी चांद मोहम्मद उर्फ चांद खान जोर-जोर से रोते और कांपती आवाज़ में अपनी जान को लेकर भय व्यक्त करता दिख रहा है। वीडियो में वह कहता है:
“मैं सरेंडर करने आया हूं, लेकिन नीचे एसओजी वाले घात लगाए बैठे हैं। मुझे फर्जी एनकाउंटर में मार देंगे। मैं बेगुनाह हूं, मेरी जान बचा लो।”
चांद मोहम्मद ने दावा किया कि उस पर दर्ज कई मुकदमों में उसका नाम झूठा डाला गया है।
उसने कहा कि वह गरीब आदमी है और पहले भी उसे फर्जी केस में फंसाया गया था।
वकील ने भी लगाया बड़ा आरोप— “कचहरी में ही पुलिस घात लगाए बैठी थी”
युवक के वकील आस मोहम्मद ने भी पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि:
• उनके मुवक्किल ने 16 नवंबर को सरेंडर एप्लिकेशन लगाया था।
• पुलिस ने रिपोर्ट समय पर नहीं दी, जिसके चलते तारीख 18 से आगे बढ़कर 20 नवंबर कर दी गई।
• 20 नवंबर को चांद मोहम्मद कोर्ट पहुंचा, मगर नीचे एसओजी के हथियारबंद जवान उसके लिए घात लगाए बैठे थे।
• वकील के अनुसार, यह स्थिति “कचहरी में कानून व्यवस्था की चिंता बढ़ाने वाली” है।
वकील ने आशंका जताई कि यदि तुरंत न्यायालय में प्रस्तुत न किया गया, तो पुलिस उसे गोली मार सकती है।
वीडियो के 24 घंटे बाद पुलिस मुठभेड़ का दावा, पैर में गोली लगने के बाद गिरफ्तारी
वीडियो वायरल होने के अगले ही दिन, शुक्रवार दोपहर, पुलिस ने पीन्ना बाईपास पर चांद मोहम्मद को मुठभेड़ में घायल कर पकड़ने का दावा किया।
सीओ सिटी सिद्धार्थ मिश्रा के अनुसार, एसएसपी के आदेश पर पुलिस ने घेराबंदी की, जिसके दौरान चांद मोहम्मद ने शहर कोतवाल बबलू सिंह वर्मा के नेतृत्व वाली पुलिस पार्टी पर फायरिंग की। पुलिस की जवाबी गोलीबारी में उसे पैर में गोली लगी और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने उसके पास से एक तमंचा मिलने का भी दावा किया है।
पुलिस बोली— “7 मुकदमों में वांछित, 10 हजार का इनामी, शातिर अपराधी”
पुलिस के अनुसार चांद मोहम्मद पर,आर्म्स एक्ट और गोहत्या समेत मुज़फ्फरनगर, कानपुर देहात और हरिद्वार में 7 अलग-अलग मुकदमे है । 4 मामलों में लंबे समय से फरार था और नई मंडी थाना द्वारा 10 हजार रुपये का इनाम भी घोषित है ।
पुलिस का कहना है कि युवक पर कार्रवाई नियमों के अनुरूप की गई।
परिवार और वकील बोले— “फर्जी केस, जान का खतरा था; वीडियो इसका सबूत”
युवक के परिवार और वकील का कहना है कि: • चांद मोहम्मद 20नवंबर को कोर्ट में सरेंडर करने आया था लेकिन एसओजी की संदिग्ध गतिविधियों को देखकर उसने वकील के चैंबर में पनाह ली।
• वीडियो में उसकी दयनीय हालत और भय स्पष्ट दिखता है।इसके अगले ही दिन पुलिस मुठभेड़ होना सवाल खड़े करता है।
उनका कहना है कि पुलिस ने “पहले से तय स्क्रिप्ट” के अनुसार इस कार्रवाई को अंजाम दिया।
मामले ने उठाए बड़े सवाल
यह घटना कई अहम सवाल छोड़ जाती है:
• क्या युवक वाकई कोर्ट में सरेंडर करने आया था?
• कचहरी परिसर में एसओजी की मौजूदगी का उद्देश्य क्या था?
• वीडियो वायरल होने के अगले ही दिन मुठभेड़ होना महज संयोग है या कुछ और?
• क्या आरोपी के खिलाफ मुकदमे वास्तविक थे या फर्जी होने के आरोपों की भी जांच होगी?
• क्या पुलिस मुठभेड़ SOP के तहत हुई या इसकी निष्पक्ष जांच की जरूरत है?
स्थानीय स्तर पर मामले को लेकर चर्चा तेज है। कई लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि पुलिस अपने दावे पर अड़ी है कि कार्रवाई पूर्णतः कानूनी थी और आरोपी ने पुलिस पर फायरिंग की थी।


