मुजफ्फरनगर। ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के सरकारी दावों के बीच, मुजफ्फरनगर से तालीम के केंद्र पर भेदभाव का एक शर्मनाक मामला सामने आया है। तितावी थाना क्षेत्र के एक दलित दंपति ने आरोप लगाया है कि उनके जेल जाने के बाद विद्यालय प्रबंधन ने उनकी दो नाबालिग पुत्रियों को न सिर्फ स्कूल से निकाल दिया, बल्कि जातिगत टिप्पणी भी की गई। पीड़ित दंपति ने जिलाधिकारी से न्याय और बच्चियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए हस्तक्षेप की मांग की है।तितावी थाना क्षेत्र के नरोत्तमपुर माजरा निवासी धीरज कुमार और उनकी पत्नी प्रतिभा रानी का कहना है कि पड़ोसियों से मामूली इख्तिलाफ़ के चलते पुलिस ने उन्हें और उनकी पत्नी को जेल भेज दिया था। इस दौरान उनकी तीन बेटियां घर पर अकेली थीं। दंपति के जेल जाते ही, उनकी दो नाबालिग पुत्रियां गुरमीत रानी (कक्षा 9) और उपासना रानी (कक्षा 8), जो कल्याणकारी कन्या इंटर कॉलेज, काजीखेड़ा-जागाहेड़ी में पढ़ती थीं, उनका नाम स्कूल से काट दिया गया।धीरज कुमार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब वह और उनकी पत्नी जेल से रिहा होकर अपनी बेटियों को लेकर स्कूल पहुंचे, तो प्रबंधन ने साफ़ कह दिया कि “तुम्हारे माता-पिता जेल में हैं, हम ऐसे बच्चों को नहीं पढ़ा सकते।”पीड़िता प्रतिभा रानी का आरोप है कि स्कूल की मैडम ने दबंगई दिखाते हुए जातिसूचक टिप्पणी की। महिला ने जिलाधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में कहा कि मैडम ने उनसे कहा, “तुम वाल्मीकि हो, जेल से आए हो, हम तुम्हारे बच्चों को नहीं पढ़ाएंगे।” इसके बाद उन्हें बच्चों की स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) थमाते हुए कहीं और दाखिला कराने को कह दिया गया।पीड़ित दंपति ने बताया कि उन्होंने पूर्व में भी जिला कारागार कार्यालय के माध्यम से जिलाधिकारी और जज साहब को इस संबंध में शिकायत भेजी थी, लेकिन महीनों गुज़र जाने के बाद भी स्कूल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।धीरज कुमार ने डीएम से गुहार लगाई कि स्कूल प्रशासन के इस रवैये से उनकी दोनों पुत्रियों का भविष्य अंधकार में पड़ गया है। मानसिक दबाव के चलते दोनों छात्राएं तनावग्रस्त हैं और उनकी तबीयत भी बिगड़ गई है।
पीड़िता ने जिलाधिकारी से मांग की है कि शिक्षा विभाग को निर्देशित कर विद्यालय प्रबंधन की पहचान की जाए और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, जिला विद्यालय निरीक्षिका को निर्देशित कर तुरंत कल्याणकारी कन्या इंटर कॉलेज, काजीखेड़ा-जागाहेड़ी में गुरमीत रानी और उपासना रानी का पुनः दाखिला सुनिश्चित कराया जाए, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और उनका शैक्षणिक भविष्य सुरक्षित रह सके।


