मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली जाट नेता के रूप में अपनी पहचान बना चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री और मुजफ्फरनगर के पूर्व सांसद डॉ. संजीव बालियान (53 वर्ष) एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वे किसी राजनीतिक बयान के लिए नहीं, बल्कि अपनी शिक्षा को लेकर सुर्खियों में हैं। डॉ. बालियान ने अब औपचारिक रूप से कानून की पढ़ाई (LL.B.) करने का फैसला किया है।डॉ. संजीव बालियान ने मुजफ्फरनगर के एक कॉलेज में एलएलबी कोर्स के फर्स्ट ईयर में दाखिला लिया है। उनका यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वह हाल ही में लोकसभा चुनाव 2024 में सपा उम्मीदवार हरेंद्र सिंह मलिक से 24,672 वोटों से हार गए थे, और इसके बाद कांस्टीट्यूशन क्लब के चुनाव में भी भाजपा सांसद राजीव प्रताप रूडी (जो स्वयं लॉ बैकग्राउंड से आते हैं) से भी उन्हें मात मिली थी।डॉ. संजीव बालियान का जन्म मुजफ्फरनगर के एक किसान परिवार में 23 जून 1972 को हुआ था। वह भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 में मुजफ्फरनगर सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। केंद्र सरकार में उन्होंने कृषि, फूड प्रोसेसिंग, जल संसाधन-गंगा पुनर्जीवन और पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन राज्यमंत्री के तौर पर महत्वपूर्ण काम किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दो बार मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके और केंद्र सरकार में कृषि, जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों के राज्यमंत्री रह चुके डॉ. बालियान अब अपनी राजनीतिक और सामाजिक समझ को कानून की औपचारिक पढ़ाई से और मजबूत करना चाहते हैं।
माना जा रहा है कि कानून की बारीकियों और दांव-पेचों को सीखकर, वह किसानों से जुड़े मुद्दों, भूमि कानून और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे विषयों पर अधिक गहराई और कानूनी दृष्टिकोण के साथ अपनी बात रख पाएंगे। स्थानीय भाजपा नेताओं का कहना है कि पूर्व सांसद का उद्देश्य समाज को जागरूक करना है, ताकि वे जनता की आवाज को और प्रभावशाली ढंग से उठा सकें।
डॉ. संजीव बालियान का यह कदम यूपी के बदलते राजनीतिक माहौल में एक नई दिशा का संकेत दे रहा है, जहाँ नीतिगत विषयों पर कानूनी दृष्टिकोण से बात रखने की आवश्यकता महसूस हो रही है।


