मुजफ्फरनगर। कलेक्ट्रेट स्थित चौधरी चरण सिंह सभाकक्ष में आयोजित जिला पंचायत बोर्ड की महत्वपूर्ण बैठक में आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 52.97 करोड़ रुपये का संतुलित बजट सर्वसम्मति से पारित किया गया। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल की अध्यक्षता और सिटी मजिस्ट्रेट पंकज प्रकाश राठौर की मौजूदगी में हुई इस बैठक में विकास योजनाओं और जिले की वित्तीय स्थिति पर विस्तृत चर्चा की गई। हालांकि, सीमित संसाधनों के चलते सदन में राजनीतिक खींचतान और प्रस्तावों की छंटनी का दौर भी देखने को मिला।
जिला पंचायत बोर्ड की बैठक भारी राजनीतिक तल्खी और गहमागहमी के बीच संपन्न हुई। आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 52 करोड़ 97लाख 30 हजार रुपये का अनुमानित बजट सर्वसम्मति से पारित किया गया। इस बजट में 18 लाख रुपये का लाभ दर्शाया गया है, लेकिन विकास कार्यों को लेकर सदन में पक्ष-विपक्ष के बीच गहरी खाई नजर आई।बैठक के दौरान समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल (सपा-रालोद) गठबंधन के सांसदों व विधायकों को बड़ा झटका लगा। सदन ने सांसद हरेंद्र मलिक, सांसद चंदन चौहान, विधायक मिथलेश पाल और विधायक मदन भैया द्वारा दिए गए सड़क निर्माण व लाइटों के प्रस्तावों को बजट के अभाव का हवाला देकर सिरे से खारिज कर दिया। तर्क दिया गया कि सांसदों और विधायकों के पास अपनी निधि होती है, जिससे वे ये कार्य करा सकते हैं। इसके उलट, प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल कुमार के प्रस्ताव को तत्काल मंजूरी दे दी गई, जिसके तहत लालूखेड़ी बस स्टैंड पर चौधरी चरण सिंह स्मारक का सौंदर्यीकरण और वाटर कूलर लगाने का कार्य किया जाएगा।एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में, बोर्ड ने चुनावी प्रक्रिया के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के शुल्क में बेतहाशा वृद्धि कर दी है। अब ग्राम पंचायत सदस्य के लिए शुल्क 100 से बढ़ाकर 500 रुपये और लोकसभा चुनाव के लिए शुल्क 500 से बढ़ाकर सीधे 2000 रुपये कर दिया गया है। अध्यक्ष वीरपाल निर्वाल ने स्पष्ट किया कि सीमित संसाधनों के कारण जनहित के अति-आवश्यक कार्यों को ही प्राथमिकता दी जा रही है। इस निर्णय से विपक्षी खेमे में भारी असंतोष देखा जा रहा है।


