मुजफ्फरनगर। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, फेडरेशन पेपर मिल एसोसिएशन और लघु उद्योग भारती के संयुक्त तत्वाधान में मेरठ रोड स्थित फेडरेशन भवन में उद्योगपतियों ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने मुजफ्फरनगर में फैलाई जा रही भ्रांतियों को दूर करते हुए कहा कि प्रदेश में प्रदूषण के लिए उद्योग जिम्मेदार नहीं हैं।उद्योगों के पदाधिकारियों ने बताया कि सभी फैक्ट्रियों में उत्सर्जन निर्धारित मानकों के अनुसार नियंत्रित किया जाता है और अपशिष्ट का निस्तारण वैज्ञानिक तरीके से होता है। उन्होंने कहा कि उद्योगों में प्रयोग होने वाले ईंधन और अपशिष्ट जलाने की प्रक्रिया से किसी प्रकार का अतिरिक्त हानिकारक प्रदूषण नहीं होता। हर उद्योग में ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लगा है, जिसका डेटा 24 घंटे यूपी पॉल्यूशन बोर्ड और सीपीसीबी को भेजा जाता है।प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईआईए के नेशनल सेक्रेट्री कुश पुरी ने बताया कि आरडीएफ का उपयोग स्वच्छ भारत अभियान के तहत किया जा रहा है और इसे सीपीसीबी, यूपीपीसीबी और सीएक्यूएम द्वारा निर्धारित नियमों के अंतर्गत नियंत्रित किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि आरडीएफ उद्योगों के साथ-साथ नगर निकाय द्वारा भी ऊर्जा उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और केंद्रीय एजेंसियां इस पर निगरानी रखती हैं।प्रभात कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि जनपद की औद्योगिक इकाइयों से संबंधित उत्सर्जन और पर्यावरणीय डेटा का विस्तृत अध्ययन किया गया है। इसके आधार पर उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदूषण के लिए केवल उद्योगों को दोषी ठहराना उचित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार हैं।प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईआईए डिविजनल सेक्रेटरी पवन कुमार गोयल, बिंदल पेपर मिल से मयंक बिंदल, सिल्वरटोन पेपर मिल से प्रसून अग्रवाल, स्किल डेवलपमेंट अध्यक्ष अश्विनी खंडेलवाल, पूर्व अध्यक्ष अशोक अग्रवाल, विपुल भटनागर, नवीन अग्रवाल, लघु उद्योग भारती के क्षेत्रीय अध्यक्ष राजेश जैन, फेडरेशन के पूर्व अध्यक्ष अंकित संगल सहित कई प्रमुख उद्योगपति और प्रतिनिधि मौजूद रहे।


